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69000 शिक्षक भर्ती मामला एक बार फिर चर्चा में है। लखनऊ में डिप्टी सीएम आवास के बाहर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का हंगामा, हाईकोर्ट के फैसले पर अमल न होने से गरीब उम्मीदवार हताश।

हाइलाइट्स :

  • 69000 शिक्षक भर्ती मामला को लेकर लखनऊ में बड़ा प्रदर्शन
  • डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आवास के बाहर अभ्यर्थियों का घेराव
  • “केशव चाचा न्याय करो” के नारों से गूंजा इलाका
  • हाईकोर्ट डबल बेंच के फैसले को लागू न करने का आरोप
  • पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को इको गार्डन भेजा
  • गरीब, पिछड़े और दलित अभ्यर्थियों में गहरी नाराज़गी

लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती मामला एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। सोमवार को लखनऊ में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई न होने और सरकार की निष्क्रियता से नाराज़ अभ्यर्थियों ने सड़क पर बैठकर न्याय की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने “केशव चाचा न्याय करो” के नारे लगाए। हालात बिगड़ते देख पुलिस बल मौके पर पहुंचा और सभी प्रदर्शनकारियों को बसों में भरकर इको गार्डन धरना स्थल भेज दिया।

अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार चाहती तो लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच के 13 अगस्त 2024 के फैसले को लागू कर सकती थी। इसके बावजूद जानबूझकर मामले को लटकाया गया, जिससे यह सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया और हजारों गरीब अभ्यर्थी आज भी नियुक्ति से वंचित हैं।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने बताया कि वर्ष 2018 में शुरू हुई 69000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग के साथ गंभीर अन्याय हुआ। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हाईकोर्ट ने नियुक्ति का स्पष्ट आदेश दिया, लेकिन सरकार ने अब तक उस पर अमल नहीं किया।

उन्होंने कहा कि इससे पहले भी कई बार उपमुख्यमंत्री से मुलाकात हुई और त्वरित न्याय का आश्वासन दिया गया, लेकिन अधिकारी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कुछ दिनों में निपटने वाला मामला वर्षों से लटका हुआ है, जिससे पिछड़े, दलित और आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थी मानसिक और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

प्रदर्शन में विक्रम यादव, अमित मौर्या, अनिल कुमार, धनंजय, मो. इरशाद, राहुल मौर्या, उमाकांत मौर्या, शिव मौर्या, अर्चना मौर्या, कल्पना और शशि पटेल सहित बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल रहे।

अब देखना होगा कि प्रदेश सरकार और प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं या 69000 शिक्षक भर्ती मामला यूं ही सियासी बयानबाज़ी में उलझा रहेगा।