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  • यूपी भाजपा के चौथे कुर्मी प्रदेश अध्यक्ष हैं महराजगंज के सांसद पंकज चौधरी
  • उनसे पहले स्वतंत्र देव, विनय कटियार व ओम प्रकाश सिंह भी रह चुके हैं इस पद पर
  • नामांकन के लिए प्रस्तावकों के चयन में भी हर जाति का रखा गया ख्याल

अभयानंद शुक्ल
समन्वय सम्पादक

लखनऊ। पार्षद के रूप में राजनीति की शुरुआत करने वाले पंकज चौधरी अब प्रदेश भाजपा संगठन के मुखिया बन गए हैं। ये सात बार के सांसद व मोदी सरकार में वित्त राज्य मंत्री हैं। बीते शनिवार को उनका अकेले नामांकन होने के साथ ही तय हो गया कि यूपी में भाजपा के नए ‘चौधरी’ अब पंकज ही होंगे। वर्ष 2027 में होने वाले के विधान सभा चुनाव के दृष्टिगत भाजपा ने प्रदेश की राजनीति में बड़ा और सोचा-समझा कदम उठाते हुए पीडीए फार्मूले की काट के लिए ओबीसी कार्ड खेल दिया है। पिछड़ा वर्ग में यादवों के बाद दूसरा बड़ा वर्ग कुर्मी समाज है। बीते लोकसभा चुनाव में कुर्मियों के पार्टी के दूर हो जाने को देखते हुए भी पार्टी का यह निर्णय महत्वपूर्ण है। यह बदलाव यूपी की 50 सीटों पर भाजपा के लिए मुफ़ीद रहेगी।


निर्वाचन के लिए प्रस्तावकों में ठाकुर, ब्राह्मण, पारसी, भूमिहार, दलित और ओबीसी समाज के नेताओं को शामिल कर भाजपा ने सामाजिक समरसता का भी संदेश देने की कोशिश की है। इसके जरिए पार्टी ने सामाजिक संतुलन और एकजुटता का भी स्पष्ट संदेश दिया। पंकज के प्रस्तावकों में मुख्यमंत्री योगी, दोनों डिप्टी सीएम केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान, नगर विकास मंत्री एके शर्मा, सांसद कमलेश पासवान के अलावा प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण भी शामिल रहे। चूंकि पंकज चौधरी के खिलाफ किसी अन्य ने नामांकन नहीं किया, ऐसे में उनका निर्विरोध चुना जाना तय था। निर्वाचन की औपचारिक घोषणा केंद्रीय चुनाव अधिकारी व केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने की।

अमित शाह ने की थी बड़ा आदमी बनाने की घोषणा

30 मई 2024 को एक सभा के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि आप पंकज चौधरी को सांसद बनाइए, हम इनको बड़ा आदमी बनाएंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि ये बहुत अनुभवी सांसद हैं और इनके अनुभव का लाभ पार्टी और सरकार को मिलना ही चाहिए। इसके अलावा पंकज चौधरी को पीएम मोदी की गुड बुक का माना जाता है, और उन्हें इसका भी लाभ मिला है। हालांकि चर्चा यही है कि इनकी सीएम योगी आदित्यनाथ से कम पटती है, लेकिन नामांकन के दौरान जिस तरह से योगी सक्रिय थे, उसे देखकर अब इन चर्चाओं पर भी विराम लग गया है।

अध्यक्ष तो बन गए पर पंकज करेंगे क्या और कैसे

पार्षद के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले केंद्रीय राज्यमंत्री पंकज चौधरी यूपी की महाराजगंज लोकसभा सीट से सात बार सांसद चुने जा चुके हैं। ये तब भी चुने गए जब देश में भाजपा चुनाव हार गई थी और यूपीए सरकार बनी थी। वर्तमान में वे केंद्र सरकार में वित्त राज्यमंत्री के पद पर कार्यरत हैं। उनका जन्म 20 नवंबर 1964 को गोरखपुर में हुआ था। कुर्मी समुदाय से आने वाले पंकज चौधरी का परिवार भी राजनीतिक से जुड़ा रहा है। उनकी माता उज्ज्वला चौधरी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। एक जानकारी के अनुसार उनकी कुल संपत्ति लगभग 37 करोड़ रुपए नम्बर एक में है। सूत्रों के अनुसार उनके लंबे राजनीतिक सफर को देखते हुए पंकज चौधरी का निर्विरोध चयन भाजपा की रणनीतिक मजबूती की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

हालांकि उनके आलोचक कहते हैं कि उनका राजनीतिक प्रभाव महराजगंज जिले से आगे नहीं है, और संगठन चलाने का भी अनुभव नहीं है। यह भी कहा जाता है कि अपने जिले के बाहर वे राजनीति में कोई बड़ा नाम भी नहीं हैं। पर उनकी एक खासियत ये है कि वे मोदी की गुड बुक के हैं। ऐसे में शायद उन्हें केंद्र के रबर स्टाम्प के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। और इसी बहाने योगी आदित्यनाथ को यह मैसेज भी है कि प्रदेश संगठन पर केंद्रीय नेतृत्व का दबदबा बना रहेगा। पर अब आने वाला समय ही बताएगा कि उनके लो प्रोफाइल के बावजूद उनकी बंपर ताजपोशी का राज क्या है।