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एसआईआर मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सीएम ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा—“न्याय बंद दरवाजों के पीछे रो रहा है।”

हाइलाइट्स :

  1. SIR प्रक्रिया को ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
  2. CJI जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में सुनवाई
  3. कोर्ट में ममता की भावुक दलील—“न्याय बंद दरवाजों के पीछे रो रहा है”
  4. वोटर नाम हटाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
  5. विधानसभा चुनाव 2026 से पहले बढ़ा राजनीतिक तनाव

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) प्रक्रिया को चुनौती देते हुए भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है।

सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोर्ट में भावुक अंदाज में कहा, “जब सब कुछ खत्म हो जाता है और हमें न्याय नहीं मिलता, तब न्याय बंद दरवाजों के पीछे रो रहा होता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के जरिए वास्तविक और वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।

‘मैं कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं हूं’

कोर्ट में अपनी बात रखते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वह किसी व्यक्तिगत या पार्टी हित के लिए नहीं, बल्कि आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए खड़ी हैं। उन्होंने कहा, “मैं कोई बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं हूं। मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही हूं, बल्कि उन लोगों के लिए लड़ रही हूं, जिनके नाम बिना वजह मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।”

मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा कि पश्चिम बंगाल राज्य ने भी अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत याचिका दायर की है और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पहले ही राज्य की आशंकाओं को अदालत के सामने रखा है।

महिलाओं और गरीबों पर असर

सीएम ममता ने SIR प्रक्रिया को अव्यवस्थित और जनविरोधी बताते हुए कहा कि शादी के बाद महिलाओं द्वारा सरनेम बदलने को भी नाम हटाने का आधार बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई गरीब परिवार रोजगार के लिए अस्थायी रूप से पलायन करते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वे राज्य के स्थायी निवासी नहीं हैं।

ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव की पूर्व संध्या पर केवल पश्चिम बंगाल में इस तरह की प्रक्रिया लागू करना संदेह पैदा करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चार राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, तो केवल बंगाल को ही क्यों निशाना बनाया गया।

समय और हालात पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल कटाई के मौसम और लोगों के आवागमन के समय इस तरह की प्रक्रिया से आम जनता को भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के दौरान हिंसा की घटनाएं हुईं, कई लोग मारे गए और बीएलओ समेत कई लोग घायल हुए।

आधार सहित अन्य दस्तावेजों पर राहत

ममता बनर्जी ने अदालत के उस आदेश का स्वागत किया, जिसमें आधार कार्ड को वैध दस्तावेजों में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से संतुष्ट हैं, लेकिन चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल बने हुए हैं।