क्या मिट्टी के बर्तन बदल देंगे भविष्य? माटीकला उद्योग को मिला बड़ा समर्थन!

राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क  लखनऊ : उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड के तत्वावधान में आयोजित ‘राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह-2025’ का भव्य उद्घाटन गांधी भवन प्रेक्षागृह, लखनऊ में किया गया। इस अवसर पर माटीकला सेमिनार कार्यक्रम भी आयोजित हुआ, जिसमें उत्कृष्ट कारीगरों को टूल किट्स वितरित की गईं और उद्योग से जुड़े हितधारकों को सहयोग एवं संसाधन उपलब्ध कराए गए।

क्या मिट्टी के उत्पाद पॉलीथीन का सबसे बेहतर विकल्प हैं?
माटीकला, खादी एवं ग्रामोद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने अपने संबोधन में कहा कि पॉलीथीन के विकल्प के रूप में माटीकला उत्पादों को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने जनता से अधिक से अधिक कुल्हड़, मिट्टी के गिलास, थाली, बोतल, कुकर और कड़ाही जैसी वस्तुओं का उपयोग करने की अपील की।

माटीकला उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बड़े कदम!
✅ तीन हजार विद्युत चालित चॉक का वितरण
✅ 375 पगमिल मशीनों की आपूर्ति
✅ 300 नई इकाइयों की स्थापना
✅ 4800 लाभार्थियों को प्रशिक्षण
✅ एक सीएफसी (सामूहिक सुविधा केंद्र) की स्थापना

अब तक कितने कारीगरों को मिला लाभ?
🔹 48,048 माटीकला कारीगर परिवारों का चिन्हांकन
🔹 32,593 कारीगर परिवारों को मिट्टी खोदने के पट्टे वितरित
🔹 81 दीया मेकिंग मशीनें और 31 पेंटिंग मशीनें वितरित
🔹 15,832 विद्युत चालित चॉक का वितरण पूरा

क्या यह पहल मिट्टी के बर्तनों को फिर से मुख्यधारा में ला पाएगी? क्या लोग प्लास्टिक को छोड़कर पारंपरिक और इको-फ्रेंडली उत्पादों को अपनाएंगे?

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