पुरुषों से आगे निकलीं महिलाएं – बिहार में 71% महिला वोटिंग, क्या नीतीश की कुर्सी बचाएंगी महिला मतदाता?

पुरुषों से आगे निकलीं महिलाएं – बिहार में 71% महिला वोटिंग, क्या नीतीश की कुर्सी बचाएंगी महिला मतदाता?
“बिहार विधानसभा चुनाव में महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा वोट डाले। 71.06% महिला मतदान, क्या नीतीश कुमार की सत्ता को फिर बचाएंगी महिला वोटर?”

पटना | बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं ने एक बार फिर पुरुषों से ज्यादा वोट डालकर इतिहास दोहराया है। कुल मतदान 66.91% रहा, जिसमें 71.06% महिला वोटिंग और 62.8% पुरुष मतदान हुआ। यानी महिलाओं ने पुरुषों से 8.26% ज्यादा मतदान किया।
यह सिलसिला नया नहीं है — 2010 से लगातार महिला वोटर बिहार की राजनीति की निर्णायक धुरी बन चुकी हैं।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस बार का चुनाव पूरी तरह “महिला फैक्टर” के इर्द-गिर्द घूमता रहा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार — दोनों ने महिला वोटर्स को साधने के लिए अलग-अलग रणनीतियाँ अपनाईं।


महिला वोटर – साइलेंट से डिसाइडिंग वोटर तक

2010 से लेकर 2025 तक के आंकड़ों से पता चलता है कि बिहार में महिलाएं सिर्फ वोट नहीं दे रहीं, बल्कि सत्ता की दिशा तय कर रही हैं।

  • 2010: पुरुष 53%, महिला 54.5%
  • 2015: पुरुष 51.1%, महिला 60.4%
  • 2020: पुरुष 54.6%, महिला 59.7%
  • 2025: पुरुष 62.8%, महिला 71.06%

यानी पिछले चार चुनावों में हर बार महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान किया है।


नीतीश कुमार की ‘महिला नीति’

  • नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति में महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखा।
  • 2006 में पंचायतों में 50% महिला आरक्षण की पहल,
  • साइकिल योजना, मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म,
  • महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) — 10 लाख से ज्यादा समूह,
  • शराबबंदी कानून — महिलाओं की मांग पर लागू किया गया।

यही कारण है कि 2020 के चुनाव में एनडीए की जीत का श्रेय पीएम मोदी ने महिला वोटरों को दिया था।


महिला वोटिंग से बदला देशभर का समीकरण

बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में महिला वोटिंग का प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा हो गया है।
2019 के लोकसभा चुनाव में महिला मतदान 67.18% था जबकि पुरुषों का 67.01%।
2024 में भी महिलाएं 65.78% और पुरुष 65.55% पर रहीं।

कर्नाटक, हिमाचल, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में महिला वोटरों ने सत्ता बदलने में अहम भूमिका निभाई।


  • महिलाओं पर केंद्रित योजनाओं का असर
  • लाडली बहना योजना (MP)
  • उज्ज्वला योजना (केंद्र)
  • शौचालय निर्माण, मुफ्त राशन और आवास योजना

इन योजनाओं ने महिलाओं के बीच सरकार की विश्वसनीयता बढ़ाई है।
राजनीतिक रणनीतिकार मानते हैं कि “महिला वोट अब जाति और धर्म से परे एक बड़ा वर्ग बन चुका है।”


क्या नीतीश की सत्ता बचाएंगी महिलाएं?

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, महिला वोटिंग में 8% की बढ़ोतरी सीधे तौर पर एनडीए को फायदा पहुंचा सकती है।
हालांकि, महागठबंधन ने भी महिलाओं के लिए हर साल ₹30,000 की योजना का वादा कर सियासी चुनौती पेश की है।
अब सवाल यही है —

क्या नीतीश कुमार की सियासी ‘ढाल’ फिर बनेंगी बिहार की महिलाएं?

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