श्री विद्या मठ पहुंचे अजय राय, बोले- ‘यह संपूर्ण सनातन का अपमान’

“अजय राय श्री विद्या मठ मुलाकात के दौरान वाराणसी में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से भेंट कर हालिया घटनाक्रम को सनातन धर्म और हिंदुत्व का अपमान बताया। एसीपी और आशुतोष ब्रह्मचारी की फोटो को सुनियोजित षड्यंत्र करार दिया। ” पढ़ें वाराणसी, उत्तर प्रदेश की यह प्रमुख राजनीतिक खबर…

हाइलाइट्स:

  • अजय राय ने वाराणसी के श्री विद्या मठ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से की मुलाकात।
  • हालिया घटनाक्रम को सनातन धर्म और हिंदुत्व का अपमान बताया।
  • एसीपी और आशुतोष ब्रह्मचारी की केक काटते फोटो पर उठाए सवाल।
  • मामले को सुनियोजित षड्यंत्र बताते हुए सरकार पर साधा निशाना।
  • धार्मिक भावनाओं के सम्मान की मांग, कांग्रेस ने जताई कड़ी आपत्ति।

वाराणसी। मंगलवार दोपहर वाराणसी स्थित श्री विद्या मठ का परिसर उस समय सियासी सरगर्मी का केंद्र बन गया, जब उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय वहां पहुंचे। उन्होंने मठ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से भेंट कर उनका कुशलक्षेम जाना और हालिया घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा की।

मुलाकात के दौरान अजय राय ने हाल की विवादित घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, “यह केवल एक संत का अपमान नहीं, बल्कि संपूर्ण सनातन धर्म, हिंदू समाज और हिंदुत्व का अपमान है। सरकार का यह कृत्य अक्षम्य है और इसे किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।”

फोटो दिखाकर साजिश का आरोप

अजय राय ने इस संदर्भ में आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी के साथ एक एसीपी की केक काटते हुए तस्वीर भी प्रस्तुत की। उन्होंने दावा किया कि यह पूरा घटनाक्रम सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा प्रतीत होता है। राय के अनुसार, इस प्रकार की गतिविधियां धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के साथ-साथ समाज में अस्थिरता और विभाजन की स्थिति पैदा कर सकती हैं।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी धर्मों और संतों का सम्मान होना चाहिए। “यदि इस तरह की घटनाओं पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा,” उन्होंने जोड़ा।

धर्मनिरपेक्षता पर कांग्रेस का रुख दोहराया

अजय राय ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की पक्षधर रही है। उन्होंने समाज से अपील की कि ऐसे मुद्दों पर एकजुट होकर आवाज उठाई जानी चाहिए, ताकि धार्मिक सौहार्द और सामाजिक संतुलन बना रहे।

इस दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी धार्मिक भावनाओं के सम्मान की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि संत समाज की गरिमा को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

मुलाकात के बाद श्री विद्या मठ परिसर में मीडिया की हलचल बढ़ गई और यह घटनाक्रम प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है।

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