अविमुक्तेश्वरानंद विवाद: सीएम योगी बोले- पद की गरिमा नियमों से तय, कोई स्वयंभू नहीं हो सकता शंकराचार्य

अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर पहली बार बोले मुख्यमंत्री Yogi Adityanath। विधानसभा में उन्होंने साफ कहा—“हर कोई स्वयं को शंकराचार्य नहीं लिख सकता।” माघ मेले की घटना का जिक्र करते हुए सपा पर गुमराह करने का आरोप लगाया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

हाइलाइट्स:

  • सीएम Yogi Adityanath ने कहा—“हर कोई स्वयं को शंकराचार्य नहीं लिख सकता”
  • शंकराचार्य पद विद्वत परिषद और परंपरा से मान्य होता है
  • “मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं”
  • माघ मेले में 4.50 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का किया उल्लेख
  • सपा पर लोगों को गुमराह करने और धार्मिक विकास का विरोध करने का आरोप

लखनऊ। अविमुक्तेश्वरानंद विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में जारी चर्चा के बीच मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने पहली बार विधानसभा में खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शंकराचार्य का पद सनातन परंपरा में अत्यंत सम्मानित और सर्वोच्च माना जाता है, लेकिन यह पद किसी की व्यक्तिगत घोषणा से नहीं बल्कि विधि-विधान और स्थापित परंपराओं से तय होता है।

उन्होंने कहा, “क्या कोई भी व्यक्ति अपने आपको मुख्यमंत्री, मंत्री या किसी राजनीतिक दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर प्रदेश में घूम सकता है? एक व्यवस्था है, एक प्रणाली है और सभी को उसका पालन करना होगा।”

चार पीठों की परंपरा का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख पीठों का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर में ज्योतिष पीठ, दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में जगन्नाथपुरी और पश्चिम में द्वारिकापुरी की स्थापना कर सनातन परंपरा को संस्थागत स्वरूप दिया गया।

चारों पीठ क्रमशः ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद से संबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि आज भी इन पीठों की परंपरा विद्वत परिषद और स्थापित मानकों के आधार पर संचालित होती है। “हर कोई स्वयं को शंकराचार्य नहीं लिख सकता,” उन्होंने दोहराया।

“मुख्यमंत्री भी कानून से ऊपर नहीं”

विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन नियम और परंपरा से चलता है और कानून सबके लिए समान है।

“मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं है। हम कानून का पालन करना भी जानते हैं और पालन कराना भी जानते हैं,” उन्होंने कहा।

माघ मेले की घटना का जिक्र

मुख्यमंत्री ने हालिया माघ मेले का उदाहरण देते हुए बताया कि मौनी अमावस्या के दिन लगभग 4.50 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे थे। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति निकास द्वार से प्रवेश का प्रयास करता है, तो इससे भगदड़ जैसी स्थिति बन सकती है और श्रद्धालुओं की जान को खतरा हो सकता है।

उन्होंने सवाल उठाया, “कोई जिम्मेदार व्यक्ति ऐसा आचरण कैसे कर सकता है?”

सपा पर लगाया गुमराह करने का आरोप

मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर लोगों को भ्रमित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति वास्तव में शंकराचार्य थे, तो वाराणसी में उन पर कार्रवाई क्यों हुई?

उन्होंने विपक्ष से कहा, “आपको पूजना है तो पूजिए, लेकिन हम मर्यादित लोग हैं और कानून के शासन में विश्वास रखते हैं।”

आस्था और विकास साथ-साथ

मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सपा सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और मथुरा-वृंदावन के विकास का विरोध किया।

उन्होंने कहा कि दीपोत्सव और रंगोत्सव जैसे आयोजनों से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और प्रदेश के जीडीपी में वृद्धि दर्ज की गई है।

“सनातन आस्था को कोई कैद नहीं कर सकता,” उन्होंने कहा।

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