CAG रिपोर्ट यूपीसीडा धांधली: फर्जी दस्तावेजों पर 255 करोड़ के ठेके, विधानसभा में बड़ा खुलासा

CAG रिपोर्ट यूपीसीडा धांधली में 255.75 करोड़ रुपये के ठेके फर्जी दस्तावेजों के आधार पर देने का खुलासा। लखनऊ में विधानसभा में रिपोर्ट पेश, UPSIDA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल।

हाइलाइट्स:

  • CAG रिपोर्ट में UPSIDA में 255.75 करोड़ की अनियमितता उजागर
  • फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र और FD के आधार पर ठेके आवंटित
  • 27 कार्य पात्रता मानकों के बिना दिए गए
  • 13.71 करोड़ की क्षतिपूर्ति और 1.63 करोड़ का शुल्क वसूला नहीं गया
  • वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में रिपोर्ट पेश की

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (Uttar Pradesh State Industrial Development Authority) के कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (Comptroller and Auditor General of India) की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र और वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर दो निर्माण कंपनियों को कुल 255.75 करोड़ रुपये के औद्योगिक विकास कार्यों के ठेके आवंटित कर दिए गए।

यह रिपोर्ट 19 फरवरी को उत्तर प्रदेश विधानसभा में वित्त मंत्री Suresh Kumar Khanna द्वारा सदन के पटल पर रखी गई।

फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र पर 143 करोड़ के अनुबंध

सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, मेसर्स बालाजी बिल्डर को वर्ष 2015-16 में बिना अनुभव प्रमाणपत्र का समुचित सत्यापन किए ही दो निर्माण खंडों के विकास के लिए 143.22 करोड़ रुपये के 13 अनुबंध दे दिए गए। बाद में जांच में पाया गया कि प्रस्तुत अनुभव प्रमाणपत्र फर्जी थे। इसके बाद वर्ष 2017 में इन अनुबंधों को निरस्त करना पड़ा।

इसी प्रकार, मेसर्स आकाश इंजीनियरिंग एंड बिल्डर्स को भी अनुभव प्रमाणपत्र और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के सत्यापन के बिना 112.53 करोड़ रुपये के अनुबंध आवंटित कर दिए गए। वर्ष 2018 में फर्जीवाड़ा सामने आने पर ये अनुबंध भी रद्द कर दिए गए।

तकनीकी और वित्तीय क्षमता का नहीं हुआ आकलन

रिपोर्ट में कहा गया है कि ठेकेदारों की तकनीकी और वित्तीय योग्यता का समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया। पात्रता मानकों पर खरे न उतरने वाले ठेकेदारों को 27 कार्य आवंटित कर दिए गए।

इसके अतिरिक्त,

  • 16 मामलों में 13.71 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति वसूली नहीं की गई।
  • 34 कार्यों में 1.63 करोड़ रुपये के गुणवत्ता परीक्षण शुल्क की भी वसूली नहीं हुई।

सीएजी ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताया है।

भूमि आवंटन में भी नियमों की अनदेखी

रिपोर्ट में भूमि आवंटन प्रक्रिया में भी गड़बड़ियों की ओर इशारा किया गया है।

  • मथुरा औद्योगिक क्षेत्र-बी में 3929 वर्गमीटर भूखंड 93.08 लाख रुपये में आवेदन और साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी किए बिना आवंटित किया गया।
  • कानपुर देहात के जैनपुर औद्योगिक क्षेत्र में 5018.65 वर्गमीटर भूखंड अपात्र आवेदक मेसर्स जय भगवती ट्रेडर्स को 1.10 करोड़ रुपये में आवंटित किया गया।

इन मामलों ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जवाबदेही पर सवाल, कार्रवाई की सिफारिश

सीएजी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। हालांकि रिपोर्ट में दोषी अधिकारियों पर अब तक की गई कार्रवाई का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जिससे जवाबदेही को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सदन में रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि इसे विधिवत पटल पर रखा गया है और आगे की कार्रवाई संबंधित विभाग स्तर पर की जाएगी।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस खुलासे के बाद विपक्षी दलों ने इसे सरकारी तंत्र की विफलता बताते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है। वहीं, सत्ता पक्ष का कहना है कि अनियमितताओं की जांच और सुधार की प्रक्रिया जारी है तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

कुल मिलाकर, सीएजी की यह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता, सत्यापन प्रक्रिया और वित्तीय अनुशासन की आवश्यकता को रेखांकित करती है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन सिफारिशों पर कितनी तत्परता से अमल करती है।

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