19 महीने बाद और 16 माह पहले जागी कांग्रेस

“कांग्रेस धन्यवाद रैलियां उत्तर प्रदेश में 17 लोकसभा क्षेत्रों में आयोजित होंगी। 2024 में बनी रणनीति पर 19 महीने बाद अमल, 2027 विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने और बसपा गठबंधन के संकेत।”

हाईलाइट :

  • 17 लोकसभा क्षेत्रों में होंगी कांग्रेस की धन्यवाद रैलियां
  • जून 2024 में बनी घोषणा पर अब किया जाएगा अमल
  • 2027 का चुनाव भी अकेले लड़ने की तैयारी में है पार्टी
  • प्रदेश कांग्रेस प्रभारी और अध्यक्ष ने दे दिए हैं संकेत
  • बसपा के साथ भी चुनाव लड़ने के मिल रहे संकेत

अभयानंद शुक्ल
समन्वय सम्पादक

लखनऊ। कांग्रेस पार्टी 19 महीने बाद और 16 महीने पहले जागी है। उसने 19 महीने पहले सोची हुई रणनीति पर अमल करने की सोची है। बस इसके लिए पार्टी के बड़े नेताओं की तारीख मिलने का इंतजार है। असल में 2024 के आम चुनाव में समाजवादी पार्टी के सहयोग से यूपी में मिली संजीवनी से प्रसन्न कांग्रेस के कर्ताधर्ताओं ने तय किया था कि जिन लोस क्षेत्रों में पार्टी ने चुनाव लड़ा था वहां धन्यवाद रैलियां की जाएंगी, लेकिन इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया और अब जब सपा से रिश्ते अच्छे नहीं दिख रहे तो माहौल बनाने के लिए अब पार्टी अपने 19 माह पुरानी रणनीति पर अमल करने की तैयारी में है।

इसके अलावा दबाव बनाने के लिए पार्टी कह रही है कि वह प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। इसके संकेत पार्टी के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय ने बीते शुक्रवार को दिए हैं। उन्होंने तो यहां तक कह दिया है कि अगर बसपा साथ आना चाहे तो उसका भी स्वागत है। कुल मिलाकर कांग्रेस अब खुद को मजबूत करने की कोशिश में लग गई है।

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस पार्टी भारत जोड़ो यात्रा के बाद अब ‘धन्यवाद रैलियों’ के माध्यम से जनता तक पहुंचने का प्रयास करेगी। इसीलिए लोकसभा चुनाव के बाद से अब 19 महीने की दूरी पाटने के लिए कांग्रेस इन रैलियों का आयोजन कर रही है। इसका उद्देश्य आने वाले चुनावों के लिए समर्थन जुटाना भी है।

पार्टी इन रैलियों के जरिए जनता से सीधा संवाद करना चाहती है। बस प्रतीक्षा इस बात की है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, नेता प्रतिपक्ष राहुल और सांसद प्रियंका जैसे शीर्ष नेताओं का समय मिल जाए। ताकि रैलियों की तारीखें तय की जाएं। इस तरह 19 माह बाद कांग्रेस फिर उत्तर प्रदेश में सक्रियता से मतदाताओं से जुड़ाव बढ़ाने का प्रयास करती दिख सकती है।


पार्टी के रणनीतिकारों ने तय किया है कि 2024 में मिले समर्थन का आभार जताते हुए 2027 के लिए मतदाताओं से समर्थन की अपील भी की जाए। और पार्टी की कोशिश है कि यह काम जनवरी-फरवरी में ही कर लिया जाए।


ये पार्टी के रणनीतिकारों की लापरवाही ही है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में छह सीटें जिताने के लिए मतदाताओं के प्रति आभार जताने के लिए रैलियों की जो योजना बनाई थी, उस पर अभी तक अमल नहीं किया जा सका। पर अब जब सपा से संबंध फिलहाल सामान्य नहीं दिख रहे हैं तो जनता के बीच अकेले ही जाने की तैयारी की जा रही है, ताकि दबाव भी बन सके।

पार्टी सूत्रों के अनुसार लोस चुनाव जीतने के बाद असमंजस यह था कि सपा को साथ लेकर सभी 80 लोकसभा सीटों पर रैलियां की जाएं या फिर अकेले। फिर सोचा गया कि सिर्फ उन्हीं 17 सीटों पर यह आयोजन किया जाए, जहां कांग्रेस लड़ी है। परंतु असमंजस फिर भी दूर नहीं हुआ और रैलियों की योजना ठंडे बस्ते में चली गई। पर अब जब यूपी विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा और सपा ने अपनी तैयारिया तेज दी हैं तो ऐसे में कांग्रेस को भी यूपी के वोटरों की याद आ गई है।

बसपा को साथ लाने की भी हैं कोशिशें

कांग्रेस की बहुजन समाज पार्टी से भी गठबंधन होने की चर्चाएं हैं। इसके संकेत कांग्रेस के यूपी प्रभारी अविनाश पांडेय ने मुंबई में दिए। उन्होंने कहा कि बहुत सी बातें आन कैमरा नहीं कही जा सकतीं, लेकिन किसी भी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

बीते शुक्रवार को अविनाश पांडेय ने मुंबई में यह कह कर सियासी सरगर्मी पैदा कर दी कि वैसे तो हम यूपी में सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, परन्तु अगर बसपा हमारे साथ आना चाहे तो उसका भी स्वागत है। वैसे अकेले यूपी चुनाव लड़ने के हिमायती कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद भी हैं। वे भी कह चुके हैं कि कांग्रेस को अकेले ही यूपी का चुनाव लड़ना चाहिए और कुछ ऐसा ही संकेत प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय भी दे चुके हैं।

अविनाश पांडेय के बयान पर सपा के प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने कहा है कि इस विषय पर जब तक राहुल गांधी, और मल्लिकार्जुन खड़गे कुछ नहीं कहते, हम इस बात को गंभीरता से नहीं लेंगे। उनका कहना है कि अविनाश पांडेय या अजय राय डिसीजन नहीं लेते हैं। इस विषय में कांग्रेस प्रवक्ता अजय उपाध्याय ने भी कहा कि हमारे नेता ऐसा कुछ नहीं कह सकते। और फिर अविनाश पांडेय ने यह बात अगर कही, तो किस संदर्भ में, यह जाने बगैर मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता।

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