गलवान के हीरो कर्नल संतोष बाबू की मां चुनावी मैदान में, KCR की BRS पार्टी से किया नामांकन

गलवान के हीरो कर्नल संतोष बाबू की मां बिकुमल्ली मंजुला ने सूर्यापेट नगरपालिका चुनाव में KCR की BRS पार्टी से नामांकन दाखिल किया। तेलंगाना स्थानीय निकाय चुनाव से जुड़ी पूरी खबर पढ़ें।

हाइलाइट्स :

  • गलवान शहीद कर्नल संतोष बाबू की मां बिकुमल्ली मंजुला चुनाव लड़ेंगी
  • सूर्यापेट नगरपालिका चुनाव में BRS के टिकट पर किया नामांकन
  • नामांकन के बाद पूर्व सीएम KCR की जमकर की तारीफ
  • 11 फरवरी को तेलंगाना में होंगे स्थानीय निकाय चुनाव
  • कर्नल संतोष बाबू को 2021 में मिला था महावीर चक्र

नई दिल्ली / हैदराबाद। गलवान के हीरो कर्नल संतोष बाबू की मां चुनावी राजनीति में उतर आई हैं। लद्दाख की गलवान घाटी में जून 2020 में चीनी सैनिकों से संघर्ष के दौरान शहीद हुए कर्नल बिकुमल्ला संतोष बाबू की मां बिकुमल्ली मंजुला ने तेलंगाना के सूर्यापेट नगरपालिका चुनाव में भारत राष्ट्र समिति (BRS) के टिकट पर नामांकन दाखिल कर दिया है।

सूर्यापेट कर्नल संतोष बाबू और उनके परिवार का गृह क्षेत्र है। नामांकन दाखिल करने के बाद मंजुला ने तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री और BRS प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (KCR) की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि केसीआर के नेतृत्व में तेलंगाना ने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ और आम जनता के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की गईं।

तेलंगाना में 11 फरवरी को स्थानीय निकाय चुनाव

तेलंगाना में 11 फरवरी 2026 को स्थानीय निकाय चुनाव कराए जाएंगे। इन चुनावों के तहत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और नगर पालिकाओं समेत कुल 123 स्थानीय निकायों में लगभग 3,000 सीटों पर मतदान होगा। चुनाव परिणाम दो दिन बाद घोषित किए जाएंगे, जबकि मेयर और चेयरपर्सन का चुनाव 16 फरवरी को होगा।

महावीर चक्र से सम्मानित हुए थे कर्नल बाबू

कर्नल बिकुमल्ला संतोष बाबू भारतीय सेना की 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर थे। गलवान घाटी में उन्होंने दुश्मन के सामने एक महत्वपूर्ण ऑब्जर्वेशन पोस्ट स्थापित करने का नेतृत्व किया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अंतिम सांस तक मोर्चा संभाले रखा।

उनकी अद्वितीय वीरता के लिए नवंबर 2021 में उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया, जो युद्धकाल में दिया जाने वाला देश का दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। यह सम्मान उनकी मां बिकुमल्ली मंजुला ने राष्ट्रपति से प्राप्त किया था।

शहादत से जनसेवा तक

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मंजुला का चुनावी मैदान में उतरना केवल राजनीति नहीं बल्कि शहीद सैनिक के परिवार की समाज सेवा और जनप्रतिनिधित्व की भावना को दर्शाता है। सूर्यापेट में उनके इस फैसले को सम्मान और सहानुभूति दोनों मिल रही है।

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