लखनऊ में गीता प्रेरणा उत्सव: योगी बोले—अपने धर्म में मरना अच्छा, धर्मांतरण महापाप; भागवत ने कहा—धर्म के लिए लड़ना होगा

लखनऊ गीता प्रेरणा उत्सव में RSS प्रमुख मोहन भागवत और यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक मंच साझा किया। भागवत ने कहा कि “भारत पर आक्रमण हुए, धर्मांतरण हुए, लेकिन अब हम राम मंदिर पर झंडा फहराने वाले हैं।” योगी बोले—“अपने धर्म में मरना अच्छा, धर्मांतरण महापाप है।” कार्यक्रम में गीता को राष्ट्र की प्रेरणा बताया गया।

लखनऊ। राजधानी के जनेश्वर मिश्र पार्क में रविवार को पहली बार आयोजित ‘दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव’ में RSS प्रमुख मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक मंच पर दिखे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और श्रीमद्भगवद्गीता पूजन के साथ हुआ। संत ज्ञानानंद महाराज ने भागवत और योगी को गीता की प्रति भेंट की, वहीं राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के साथ मंच पर आध्यात्मिक और राष्ट्रवादी वातावरण बना।

मोहन भागवत के बड़े बयान

भागवत ने कहा—

“हजारों साल आक्रमणकारियों के पैरों तले रौंदे जाने के बाद भी भारत बचा रहा। धर्मस्थलों को तोड़ा गया, जबरन धर्मांतरण हुए, लेकिन धर्म नहीं मिटा। अब हम राम मंदिर पर झंडा फहराने वाले हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि:

  • दुनिया आज अर्जुन जैसी मोहग्रस्त स्थिति में है
  • गीता ही संकटों से बाहर निकलने और शांति स्थापित करने का मार्ग है
  • गीता के पथ पर चलकर ही भारत विश्वगुरु बन सकता है

भागवत ने कहा कि धर्म भागने की नहीं, लड़ने की प्रेरणा देता है—लाभ-हानि, यश-अपयश की चिंता छोड़कर राष्ट्र और धर्म के लिए कर्म करना चाहिए

योगी आदित्यनाथ के 2 प्रमुख बयान

सीएम योगी ने मंच से धर्मांतरण पर सबसे तीखा बयान देते हुए कहा—

“अपने धर्म में मरना अच्छा है। लालच में दूसरा धर्म अपनाना महापाप है।”

योगी ने आगे कहा—

  • “भारत में युद्ध भी धर्मक्षेत्र होता है, क्योंकि युद्ध कर्तव्य के लिए लड़ा जाता है।”
  • “RSS को कोई विदेशी फंड, OPEC या इंटरनेशनल चर्च फंड नहीं देता—संघ समाज के सहयोग से चलता है।”

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की परंपरा श्रेष्ठता नहीं थोपती, बल्कि सहयोग और सेवा के रास्ते पर चलती है—“हमने सबको छाँव दी, किसी पर अपनी उपासना नहीं थोपी।”

कार्यक्रम का मकसद

‘जीओ गीता परिवार’ संस्था का लक्ष्य है—

  • हर व्यक्ति गीता पढ़े
  • समझे
  • जीवन में उतारे

संत ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता को अपनाने से
व्यक्ति, समाज और राष्ट्र—तीनों का कल्याण संभव है।

लखनऊ का मंच इस बार राजनीतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और राष्ट्रवाद के संगम का केंद्र रहा।
भागवत और योगी ने संदेश दिया कि—
धर्म के मार्ग पर चलकर भारत शांति, सौहार्द और विश्वगुरु की दिशा में आगे बढ़ेगा।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरें, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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