अवैध बालू खनन से पौराणिक सोन नदी पर संकट, एनजीटी गाइडलाइन बेअसर

सोनभद्र जिले के ओबरा तहसील क्षेत्र में अवैध बालू खनन से पौराणिक सोन नदी पर संकट गहराया। NGT गाइडलाइन की अनदेखी करते हुए 3 मीटर से अधिक गहराई तक मशीनों से खनन, जलीय जीवों पर खतरा। स्थानीय लोगों ने कार्रवाई की मांग की।

हाइलाइट्स:

  • सोनभद्र के ओबरा तहसील में अवैध बालू खनन का मामला
  • एनजीटी की 3 मीटर गहराई सीमा का उल्लंघन
  • मशीनों और नाव के जरिए पानी के भीतर खनन
  • जलीय जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर खतरा
  • जांच और कार्रवाई की मांग तेज

सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) । सोन नदी में अवैध बालू खनन ने स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों में गंभीर चिंता पैदा कर दी है। ओबरा तहसील के अघोरी खास मौजा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बालू खनन मशीनों के जरिए हो रहा है, जिससे नदी का पारिस्थितिकी तंत्र और जलीय जीवन खतरे में पड़ गया है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि खनन पट्टे का दुरुपयोग कर भारी मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है और 3 मीटर से अधिक गहराई में खुदाई की जा रही है। यह एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की गाइडलाइन का सीधा उल्लंघन है, जिसमें मशीनों के बजाय स्थानीय मजदूरों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

“हमने कई बार जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी दी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं,” स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।

पर्यावरण और स्थानीय जीवन पर असर

  • मशीनों से पानी में बालू निकालने से जलीय जीव-जंतुओं का अस्तित्व खतरे में
  • नदी के प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर असर
  • नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए जल संरक्षण और कृषि संकट

विशेषज्ञों का कहना है कि सोन नदी का पारिस्थितिकी संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। जलीय जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव के साथ-साथ नदी किनारे की जमीन कटाव का खतरा भी बढ़ गया है।

प्रशासनिक कार्रवाई

वरिष्ठ खान अधिकारी कमल कश्यप ने बताया कि वे जल्द ही मौके की जांच करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अवैध खनन पाया गया, तो संबंधित खनन पट्टेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सोन नदी को बचाने और खनन माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो न केवल नदी का पारिस्थितिकी तंत्र बुरी तरह प्रभावित होगा बल्कि सोन नदी पर निर्भर हजारों किसानों और ग्रामीणों की जीवनशैली भी संकट में पड़ सकती है।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button