जयपुर: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने एकात्म मानव दर्शन पर दिया व्याख्यान, संतोष को बताया सबसे बड़ा सुख

“RSS प्रमुख मोहन भागवत जयपुर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 25वीं स्मृति व्याख्यान श्रृंखला में शामिल हुए, जहाँ उन्होंने आत्मा-परमात्मा, धर्म, कर्तव्य और समरसता पर प्रेरक संबोधन दिया। जयपुर का SMS इंडोर स्टेडियम खचाखच भरा रहा।”

जयपुर, राजस्थान। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सर संघचालक डा. मोहन राव भागवत चार दिवसीय प्रवास के दौरान आज जयपुर में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 25वीं स्मृति व्याख्यान श्रृंखला में शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन एकात्म मानव दर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान के अध्यक्ष श्री महेश चंद्र शर्मा द्वारा सवाई मान सिंह इंडोर स्टेडियम में किया गया, जहाँ भारी संख्या में श्रोता मौजूद रहे और स्टेडियम खचाखच भर गया।

इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, प्रेमचंद बैरवा, कई कैबिनेट मंत्री, सांसद, विधायक, RSS पदाधिकारी, विभिन्न समाजों के प्रमुख, साधु-संत, और हिंदू संगठनों के प्रतिनिधि — VHP, सेवा भारती, बजरंग दल, शिव सेना, करणी सेना आदि उपस्थित रहे।

अपने व्याख्यान में RSS प्रमुख भागवत ने आत्मा और परमात्मा की अनुभूति, संतोष, सुख और धर्म के गहन अर्थ को सरल उदाहरणों के साथ समझाया। उन्होंने कहा कि “सुख बाहर नहीं, मनुष्य के भीतर होता है। संतोष ही सबसे बड़ा सुख है।”
उन्होंने दर्पण के उदाहरण से आत्मा की अनुभूति और कबूतर, बाज और राजा की कथा से धर्म और राष्ट्रहित की परिभाषा समझाई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “प्रजा, समाज और राष्ट्र की रक्षा करना ही वास्तविक धर्म है।”

कार्यक्रम में समरसता का भाव देखने को मिला और अनेक ऐतिहासिक पुस्तकों का निःशुल्क वितरण किया गया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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