खामेनेई की मौत पर चीन और रूस भड़के, बोले- ‘कानून का घोर उल्लंघन’

खामेनेई की मौत पर चीन और रूस की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। US-इजरायल हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए सैन्य कार्रवाई रोकने की मांग की गई।” जानें पूरी अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

हाइलाइट्स:

  • US-इजरायल हमलों में खामेनेई की मौत
  • रूस ने बताया ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन’
  • चीन ने संप्रभुता पर हमला करार दिया
  • पुतिन और शी जिनपिंग की आपात प्रतिक्रिया
  • मध्य-पूर्व में बढ़ी भू-राजनीतिक अस्थिरता

नई दिल्ली। यूएस-इजरायल के साझा हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत के बाद रूस और चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मॉस्को और बीजिंग ने सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए तत्काल रोकने की मांग की है।

86 वर्षीय खामेनेई कथित तौर पर ईरानी सैन्य व सरकारी ठिकानों पर हुए बड़े हवाई हमले में मारे गए। इस घटना के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है तथा ईरान ने जवाबी कार्रवाई में मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।

Vladimir Putin ने जताई कड़ी आपत्ति

रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने खामेनेई की मौत को “अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय मूल्यों का घोर उल्लंघन” बताया। क्रेमलिन द्वारा जारी बयान में पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian को भेजे संदेश में गहरी संवेदना व्यक्त की।

रूसी नेतृत्व का कहना है कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करेगी और बड़े संघर्ष का कारण बन सकती है।

Xi Jinping सरकार की कड़ी निंदा

चीन ने भी घटना की तीखी आलोचना की है। चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह कदम ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन है और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के विपरीत है।

चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के नेतृत्व वाली सरकार ने सभी पक्षों से संयम बरतने और सैन्य अभियान तुरंत रोकने की अपील की है।

चीनी विदेश मंत्री Wang Yi ने रूसी विदेश मंत्री Sergey Lavrov से फोन पर बातचीत की। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, वांग यी ने कहा कि किसी स्वतंत्र राष्ट्र के नेता की खुलेआम हत्या और शासन परिवर्तन को बढ़ावा देना स्वीकार्य नहीं है।

क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता

खामेनेई की मौत के बाद मध्य-पूर्व में हालात और संवेदनशील हो गए हैं। ईरान की ओर से जवाबी हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में अलर्ट जारी किया गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि रूस और चीन की कड़ी प्रतिक्रिया से यह मुद्दा वैश्विक कूटनीति के केंद्र में आ गया है। आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस विषय पर तीखी बहस होने की संभावना है।

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