‘तेज प्रताप को मेरा आशीर्वाद; अब परिवार के साथ ही रहेगा’

“Lalu Yadav on Tej Pratap: पटना में दही-चूड़ा भोज के दौरान लालू प्रसाद यादव ने तेज प्रताप यादव को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे अब परिवार के साथ ही रहेंगे। इस बयान को राजनीतिक और पारिवारिक वापसी का संकेत माना जा रहा है।”

हाइलाइट्स :

  • तेज प्रताप के दही-चूड़ा भोज में पहुंचे लालू यादव
  • बेटे को आशीर्वाद देते हुए परिवार में वापसी के संकेत
  • मतभेद को बताया सामान्य, रिश्तों में आई नरमी
  • कई दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने बढ़ाई सियासी चर्चा
  • तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी की गैरमौजूदगी भी रही चर्चा में

पटना। मकर संक्रांति के अवसर पर तेज प्रताप यादव के आवास पर आयोजित दही-चूड़ा भोज ने बिहार की राजनीति में नए संकेत दे दिए हैं। लंबे समय बाद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव जब बेटे तेज प्रताप के घर पहुंचे, तो संदेश साफ था—परिवार में दूरी नहीं, बल्कि संवाद की वापसी।

दही-चूड़ा भोज के दौरान मीडिया से बातचीत में लालू यादव ने कहा कि तेज प्रताप को उनका आशीर्वाद हमेशा मिला है और आगे भी मिलता रहेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परिवार में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका मतलब रिश्तों का टूटना नहीं होता।

“अब परिवार के साथ ही रहेगा”

लालू यादव ने दो टूक कहा कि तेज प्रताप अब परिवार के साथ ही रहेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पिछले कई महीनों से यह चर्चा थी कि तेज प्रताप पार्टी और परिवार दोनों से अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं। राजनीतिक हलकों में इसे तेज प्रताप की पारिवारिक और राजनीतिक पुनःस्थापना के रूप में देखा जा रहा है।

बीजेपी जाने की अटकलों पर प्रतिक्रिया

तेज प्रताप के बीजेपी में जाने की चर्चाओं पर भी लालू यादव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भावनात्मक लहजे में कहा कि बेटा जहां भी रहेगा, खुश और सफल रहे—यही उनकी कामना है। इस बयान को सियासी बयानबाजी से ज्यादा पिता के स्नेह के रूप में देखा जा रहा है।

मंच पर दिखी सियासी हलचल

इस दही-चूड़ा भोज में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, साधु यादव, प्रभुनाथ यादव और चेतन आनंद सहित कई राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं। खासतौर पर साधु यादव की मौजूदगी चर्चा में रही, क्योंकि अतीत में उनके और तेज प्रताप के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। एक ही मंच पर उनकी उपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दिया।

तेजस्वी-राबड़ी की गैरहाजिरी

हालांकि, इस आयोजन में तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी की अनुपस्थिति भी खूब चर्चा में रही। इसे लेकर अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं।

परिवार को जोड़ने की कोशिश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लालू यादव की मौजूदगी ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि परिवार को फिर से एकजुट करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। वहीं तेज प्रताप यादव ने भी कहा कि दही-चूड़ा भोज परंपरा, सम्मान और रिश्तों को निभाने का प्रतीक है।

कुल मिलाकर, तेज प्रताप के घर हुआ यह दही-चूड़ा भोज केवल पर्व का आयोजन नहीं रहा, बल्कि लालू यादव के आशीर्वाद और बदलते सियासी समीकरणों का मंच बन गया।

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