“मनरेगा बचाओ संग्राम: कांग्रेस ने 8 जनवरी से तीन चरणों में देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। पार्टी ने केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने और केंद्रीयकरण का आरोप लगाया है।”
Highlights :
- कांग्रेस ने ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ की घोषणा की
- 8 जनवरी से तीन चरणों में देशव्यापी आंदोलन
- पंचायत, जिला और राज्य स्तर पर प्रदर्शन
- 6 फरवरी तक डीएम कार्यालयों पर धरना
- केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप
मनरेगा बचाओ संग्राम को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा राजनीतिक अभियान छेड़ने का एलान किया है। विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम लागू होने के बाद कांग्रेस ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) को बचाने के लिए 8 जनवरी से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है।
नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि कांग्रेस कार्य समिति (CWC) ने इस आंदोलन को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ तीन चरणों में चलाया जाएगा।
पहला चरण (8 से 11 जनवरी)
वेणुगोपाल के अनुसार,
- 8 जनवरी को प्रदेश कांग्रेस कार्यालयों (PCC) में तैयारी बैठकें होंगी।
- 10 जनवरी को जिला कांग्रेस कार्यालयों में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी।
- 11 जनवरी को जिला मुख्यालयों में महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं के समक्ष एक दिन का उपवास रखा जाएगा।
दूसरा चरण (12 से 30 जनवरी)
दूसरे चरण में
- ग्राम पंचायत स्तर पर चौपालें लगेंगी
- कांग्रेस अध्यक्ष का पत्र जनता में वितरित किया जाएगा
- विधानसभा स्तर पर नुक्कड़ सभाएं होंगी
- 30 जनवरी (शहीद दिवस) पर मनरेगा मजदूरों के साथ शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा
तीसरा चरण (31 जनवरी से 25 फरवरी)
तीसरे चरण में
- 6 फरवरी तक जिला मुख्यालयों पर डीसी/डीएम कार्यालयों का घेराव
- 7 से 15 फरवरी तक राज्य-स्तरीय विधानसभा घेराव
- 16 से 25 फरवरी के बीच देशभर में कांग्रेस की चार बड़ी रैलियां होंगी
इस मौके पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सरकार मनरेगा को केंद्रीयकरण के जरिए कमजोर कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई रोजगार योजना मनमानी तरीके से लागू की गई है और कांग्रेस इसे अदालत में चुनौती देगी।
केसी वेणुगोपाल ने महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने को लेकर भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि गांधी सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि श्रम की गरिमा और गांवों के स्वशासन का प्रतीक हैं। उनका नाम हटाना अधिकार आधारित सोच पर हमला है।







