“सेंगर जमानत मामला में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने बड़ा बयान दिया। CJI ने कहा कि गलती किसी भी जज से हो सकती है। POCSO कानून में लोक सेवक की परिभाषा को लेकर SC ने चिंता जताई।”
हाइलाइट्स :
- (Sengar Bail Case) सेंगर जमानत मामला में CJI की अहम टिप्पणी
- हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की समीक्षा
- POCSO एक्ट में ‘लोक सेवक’ की परिभाषा पर सवाल
- निर्वाचित जनप्रतिनिधि को बाहर रखने पर चिंता
- जमानत मामले में कानूनी असमानता पर SC सख्त
नई दिल्ली। (Sengar Bail Case ) सेंगर जमानत मामला में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त और गंभीर रुख अपनाया है। उन्नाव रेप केस से जुड़े इस जमानत मामले की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि इस केस में गंभीर कानूनी प्रश्न शामिल हैं, जिन पर विस्तार से विचार आवश्यक है।
(Sengar Bail Case ) सेंगर जमानत मामला पर टिप्पणी करते हुए CJI ने कहा कि जिन जजों ने हाईकोर्ट में आदेश पारित किया, वे देश के सर्वश्रेष्ठ न्यायाधीशों में गिने जाते हैं, लेकिन गलती किसी भी जज से हो सकती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक समीक्षा का अर्थ किसी व्यक्ति विशेष पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि कानून की सही व्याख्या सुनिश्चित करना है।
सुनवाई के दौरान (Sengar Bail Case ) सेंगर जमानत मामला में सुप्रीम कोर्ट ने POCSO कानून में ‘लोक सेवक’ की परिभाषा को लेकर गहरी चिंता जताई। CJI ने सवाल उठाया कि जब कानून के तहत एक कांस्टेबल को लोक सेवक माना जाता है, तो फिर एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को इस परिभाषा से बाहर क्यों रखा गया है।
अदालत ने कहा कि यह कानूनी असमानता न्यायिक विवेक को परेशान करती है और इसी कारण Sengar Bail Case केवल एक जमानत याचिका नहीं, बल्कि कानून की व्यापक व्याख्या से जुड़ा मामला बन गया है।
Supreme Court ने संकेत दिए हैं कि इस पहलू पर फैसला आने वाले समय में POCSO कानून और लोक सेवकों की परिभाषा को नई दिशा दे सकता है।







