पिहानी में श्री सीताराम विवाह उत्सव चरम पर, कथा में सुनाई गई भगवान कृष्ण जन्म कथा

श्री सीताराम विवाह उत्सव पिहानी में आज ज्यौनार संस्कार संपन्न हुआ, जहां भक्तों को कढ़ी-चावल का प्रसाद वितरित किया गया। कथा व्यास ने भगवान कृष्ण के अवतार, कंस वध और गौ-सेवा के महत्व पर प्रवचन दिया। माँ इच्छापूर्णी रामजानकी मंदिर में कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया।

पिहानी (हरदोई)। श्री सीताराम विवाह उत्सव पिहानी के तहत माँ इच्छापूर्णी रामजानकी मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान पूर्णता की ओर बढ़ रहे हैं। वैवाहिक उत्सव के क्रम में परंपरागत ज्यौनार संस्कार आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में पहुँचे भक्तों को कढ़ी-चावल का प्रसाद वितरित किया गया।

पूज्य प्रकाश चंद्र जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त कराने और भक्तों के उद्धार के लिए अवतार लिया था। उन्होंने कहा कि जब-जब संसार में अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान स्वयं धरती पर अवतरित होते हैं।

कथा व्यास ने कृष्ण अवतार से जुड़े प्रसंगों का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि अत्याचारी कंस के अत्याचारों और पापों से जब धरती विचलित हुई, तब श्रीकृष्ण को जन्म लेना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुईं, तो कंस के भय से उनका मन व्याकुल था। लेकिन भगवान के जन्म लेते ही सभी बंधन टूट गए और श्रीकृष्ण सुरक्षित गोकुल पहुँचा दिए गए।

इस दौरान मंदिर परिसर में श्री कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम और भक्ति भाव से मनाया गया। आचार्य ने श्री कृष्ण की बाल लीलाओं के माध्यम से भक्तों को गौ-सेवा, संस्कार, धर्म पालन और ब्रह्म से जुड़ने के महत्व का संदेश दिया।

कार्यक्रम में मंदिर महंत वैष्णव हरिशरण जी महाराज, पिंटू मिश्रा, अजीत चौहान, सर्वेश कुमार, सचिन चौधरी, शत्रुघ्न सिंह सहित तमाम भक्त उपस्थित रहे।

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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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