श्रीमद्भागवत कथा समापन: कृष्ण–सुदामा की अमर मित्रता सुनकर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

पिहानी के माँ इच्छापूर्णी रामजानकी मंदिर में आयोजित श्री राम विवाह महोत्सव का समापन श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिवस पर हुआ। कथाव्यास ने श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता, परीक्षित मोक्ष और गोलोकधाम गमन का प्रेरक वर्णन सुनाया।

पिहानी (हरदोई)। माँ इच्छापूर्णी रामजानकी मंदिर में चल रहे श्री राम विवाह महोत्सव का रविवार को श्रीमद्भागवत कथा के भव्य समापन के साथ समापन हो गया। अंतिम दिवस पर कथाव्यास ने सुदामा चरित्र, भगवान श्रीकृष्ण के गोलोकधाम गमन, और राजा परीक्षित मोक्ष का प्रेरक प्रसंग सुनाया।

सुदामा और श्रीकृष्ण की दिव्य मित्रता पर श्रोताओं की आंखें नम

कथाव्यास ने बताया कि सच्ची मित्रता कैसी होती है, यह भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की कथा से जाना जा सकता है।
सुदामा जब अपनी पत्नी के आग्रह पर श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे, तो द्वारपाल ने उन्हें अत्यंत गरीब ब्राह्मण समझकर रोक दिया। लेकिन जैसे ही प्रभु ने “सुदामा” नाम सुना, वे अत्यंत भावुक हो उठे और “सुदामा-सुदामा” कहते हुए दौड़कर द्वार तक पहुंचे। श्रीकृष्ण ने अपने सखा सुदामा को हृदय से लगाकर सम्मान दिया। इस प्रसंग के दौरान पूरा पाण्डाल भाव-विभोर हो उठा।

भागवत कथा का महत्व बताया

कथाव्यास ने कहा कि भागवत कथा सुनने मात्र से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं, और जीव मुक्ति मार्ग की ओर अग्रसर होता है। जैसे सात दिनों तक शुकदेवजी की कथा सुनने से राजा परीक्षित का भय दूर हो गया और तक्षक नाग के विष से उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ।

समापन पर व्यास पूजन

कथा पूर्णाहुति पर मंदिर महंत वैष्णव हरिशरण महाराज ने विधिवत व्यास पूजन किया। कार्यक्रम में पुरोहित कविंद्र महाराज, गुरुचरन लाल, रामासरे रस्तोगी, राजकुमार रस्तोगी, श्यामाचरण रस्तोगी, धर्मेंद्र सोनी, बालमुकुंद, रामचन्द्र गुप्ता, अनिरुद्ध भइया सहित भारी संख्या में भक्त उपस्थित रहे।

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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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