SIR प्रक्रिया पर सपा का आरोप: ‘चुनाव आयोग SIR से BJP के वोट बढ़ाना चाहता है

“SIR प्रक्रिया विवाद गहराने लगा है। सपा नेता रामगोपाल यादव ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए चुनाव आयोग और BJP मिलकर सपा के वोट घटाने और BJP के वोट बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। सपा कार्यकर्ताओं को मतदाता सूची और SIR नोटिस पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं”

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने SIR (Special Inquiry Report) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग और बीजेपी पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। रामगोपाल यादव ने कहा कि शासन का उद्देश्य “सपा के वोट कम करना और BJP के वोट बढ़ाना” है।

उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के जरिए वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ की जा रही है और यह प्रक्रिया “एक राजनीतिक साज़िश” की तरह कार्य कर रही है।

रामगोपाल यादव ने कहा—
“शासन की मंशा हमारे वोट घटाने की है। SIR के माध्यम से बीजेपी के वोट बढ़ाए जा रहे हैं। सपा कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि इस साज़िश से सावधान रहें और चुनाव आयोग की हर कार्रवाई पर नज़र रखें।”

सपा कार्यकर्ताओं को ‘प्रहरी’ बनने का निर्देश

सपा नेता ने बताया कि जिलों और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को मतदाता सूची की जांच, SIR नोटिस पर निगरानी, और स्थानीय अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी “BJP और चुनाव आयोग दोनों पर कड़ी नज़र रखेगी।”

चुनाव आयोग ने आरोपों पर टिप्पणी नहीं की

खबर लिखे जाने तक चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं भाजपा नेता इन आरोपों को “बिना आधार” बताते रहे हैं।

SIR प्रक्रिया क्या है?

SIR यानी स्पेशल इन्क्वायरी रिपोर्ट, जिसके तहत संदिग्ध, दोहरे, या स्थानांतरित मतदाताओं की जांच की जाती है।
इसे चुनाव आयोग नियमित प्रक्रिया का हिस्सा मानता है, जबकि विपक्ष इसे कई बार “लक्षित कार्रवाई” कहता रहा है।

राजनीतिक तापमान बढ़ा

चुनाव से पहले इस बयान ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। SIR प्रक्रिया पर सपा के आरोपों ने प्रशासन और आयोग की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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