“UP Assembly Session 2026 Live में लखनऊ स्थित विधानसभा में महंगाई, खाद की कीमतों, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन और ‘बोतल महंगी’ बयान को लेकर हंगामा। कैग रिपोर्ट पेश, राष्ट्रपति अभिभाषण पारित और दोपहर 3 बजे सीएम योगी आदित्यनाथ का संबोधन प्रस्तावित।“
हाइलाइट्स:
- लखनऊ में UP Assembly Session 2026 Live के दौरान महंगाई पर तीखी बहस।
- सपा विधायक आरके वर्मा ने कविता के जरिए सरकार पर साधा निशाना।
- मंत्री अनिल राजभर ने कहा—प्रदेश सरकार खाद के दाम तय नहीं करती।
- आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन वृद्धि का मुद्दा सदन में उठा।
- दोपहर 3 बजे मुख्यमंत्री का संबोधन, कैग रिपोर्ट पेश।
लखनऊ। UP Assembly Session 2026 Live के तहत उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow स्थित विधानसभा में शुक्रवार को हंगामेदार कार्यवाही देखने को मिली। बजट सत्र के दौरान महंगाई, खाद की बढ़ती कीमतों और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन जैसे मुद्दों पर विपक्ष और सरकार आमने-सामने आ गए।
उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 का शुक्रवार का दिन हंगामेदार रहा। महंगाई, खाद के दाम, आउटसोर्सिंग कर्मियों के वेतन और कैग रिपोर्ट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि मंत्रीगण ने जवाब देकर पलटवार किया।
सदन में महंगाई का मुद्दा सबसे पहले समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों ने उठाया। सपा विधायक आरके वर्मा ने कविता के माध्यम से सरकार पर तंज कसते हुए कहा— “तेल की बोतल पूछ रही है ये, पहले तुम ही खरीदते तो मुझे… आज क्यों सोच रहे हो।” उन्होंने आरोप लगाया कि आलू किसान परेशान हैं, जबकि बिचौलिये मालामाल हो रहे हैं।
इस पर सत्ता पक्ष की ओर से जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केवल केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेज सकती है। उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश सरकार ने कोई नया टैक्स नहीं लगाया है। “बोतल की बड़ी चिंता है इन लोगों को,” कहकर मंत्री ने विपक्ष पर कटाक्ष किया। बोतल के दाम बढ़ने की टिप्पणी पर विपक्ष ने जोरदार विरोध जताया और कुछ देर के लिए सदन में हंगामा हुआ।
खाद की बढ़ती कीमतों को लेकर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि खाद के दाम कम करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है और यह निर्णय केंद्र सरकार के स्तर पर लिया जाता है।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सपा विधायक रागिनी सोनकर ने श्रम एवं रोजगार मंत्री से आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के मानदेय को लेकर सवाल किया। उन्होंने मांग की कि आउटसोर्सिंग कर्मियों को सरकारी कर्मचारियों के समान वेतन दिया जाए।
जवाब में मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि निविदा में कार्य अवधि पहले से निर्धारित होती है। कंपनियां बदल सकती हैं, लेकिन कर्मियों को नहीं हटाया जाता। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था 2009 और 2016 के आदेशों के तहत चल रही है और वर्तमान सरकार ने इसमें कोई नया निर्णय नहीं लिया है।
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “इस बार चली-चला की बेला है,” जिससे सत्ता पक्ष में हलचल देखी गई।
आज सरकार को कैग (CAG) रिपोर्ट सदन में पेश करनी है और राष्ट्रपति के अभिभाषण को पारित कराना है। दोपहर 3 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सदन को संबोधित करेंगे। ऐसे में दिन भर सदन में राजनीतिक तापमान बढ़ा रहने के आसार हैं।
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान महंगाई और किसानों के मुद्दे पर जिस तरह से सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आए, उससे स्पष्ट है कि बजट सत्र के आगामी दिन भी हंगामेदार रह सकते हैं।
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