2027 के रण की तैयारी: मायावती का ब्राह्मण कार्ड, माधौगढ़ से आशीष पांडेय को जिम्मेदारी

UP Election 2027 BSP Brahmin Candidates Plan: “बहुजन समाज पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की करीब 50% सीटों पर ब्राह्मण प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। जालौन की माधौगढ़ सीट से आशीष पांडेय को पहला प्रभारी घोषित किया गया।

हाइलाइट्स:

  • Bahujan Samaj Party 2027 में 40-50% सीटों पर ब्राह्मण प्रत्याशी उतारने की तैयारी
  • Mayawati के निर्देशन में रणनीति पर काम
  • जालौन की माधौगढ़ सीट से आशीष पांडेय को प्रभारी घोषित
  • कानपुर मंडल की 27 सीटों में से 10 पर होली बाद घोषणा संभव
  • ब्राह्मण-मुस्लिम-दलित गठजोड़ पर फोकस

कानपुर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बहुजन समाज पार्टी ने बड़ा सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बसपा प्रदेश की करीब 50 प्रतिशत सीटों पर ब्राह्मण प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। इस दिशा में पहला कदम जालौन की माधौगढ़ विधानसभा सीट से उठा लिया गया है, जहां आशीष पांडेय को प्रभारी घोषित किया गया है, जिन्हें ही आगे चलकर प्रत्याशी बनाया जाएगा।

मायावती के निर्देशन में बना नया फार्मूला

पार्टी प्रमुख मायावती के निर्देश पर संगठन स्तर पर ब्राह्मण-मुस्लिम-दलित सामाजिक संतुलन का नया खाका तैयार किया गया है। तय किया गया है कि प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से 40 से 50 सीटों पर ब्राह्मण चेहरों को उतारा जाएगा। कई जिलों में चार-चार संभावित दावेदारों का पैनल बनाकर उनकी संगठनात्मक क्षमता और जनसंपर्क का मूल्यांकन किया जा रहा है।

बसपा की परंपरा रही है कि जिस नेता को विधानसभा प्रभारी बनाया जाता है, वही आगे चलकर पार्टी का आधिकारिक प्रत्याशी घोषित होता है। इस रणनीति के तहत होली के बाद कई और सीटों पर प्रभारियों की घोषणा की संभावना है।

कानपुर मंडल पर विशेष फोकस

अकेले कानपुर मंडल में 27 विधानसभा सीटें हैं, जहां वर्तमान में बसपा का एक भी विधायक नहीं है। पार्टी यहां करीब 10 सीटों पर होली के बाद प्रभारियों की घोषणा कर सकती है। संगठन को सक्रिय करने के लिए वरिष्ठ नेता नौशाद अली को कानपुर, आगरा, मेरठ और लखनऊ मंडल की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मंगलवार को लखनऊ में नौशाद अली की मायावती से लंबी बैठक हुई, जिसमें संगठन विस्तार और प्रत्याशी चयन को लेकर चर्चा हुई। पार्टी का लक्ष्य बूथ स्तर तक ढांचा मजबूत करना और सामाजिक समीकरणों को संतुलित करना है।

ब्राह्मण, मुस्लिम और दलित समीकरण पर काम

यूजीसी प्रकरण के बाद प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण समाज की सक्रियता बढ़ी है। बसपा इस मौके को भुनाने की कोशिश में दिख रही है। पार्टी की योजना है कि ब्राह्मणों को चुनाव मैदान में उतारा जाए, मुस्लिम समुदाय को संगठन में प्रतिनिधित्व दिया जाए और दलित कैडर वोट को आधार बनाकर मजबूत सामाजिक गठजोड़ तैयार किया जाए।

पार्टी का मानना है कि सुरक्षित सीटों पर उसका पारंपरिक वोट बैंक प्रभावी रहेगा, जबकि सामान्य सीटों पर नए सामाजिक समीकरण से उसे लाभ मिल सकता है।

रसड़ा से इकलौते विधायक

वर्तमान में प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में बसपा का केवल एक विधायक है—रसड़ा (बलिया) सीट से उमाशंकर सिंह। ऐसे में 2027 के चुनाव को पार्टी पुनर्जीवन के अवसर के रूप में देख रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ब्राह्मण प्रत्याशियों को बड़ी संख्या में उतारने का फैसला बसपा के ‘सोशल इंजीनियरिंग’ मॉडल का नया संस्करण हो सकता है। अब देखना होगा कि यह रणनीति जमीनी स्तर पर कितनी कारगर साबित होती है।

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