यूपी विधानसभा बजट सत्र 2026: सील हुए कई निजी अस्पताल, लाइसेंस निरस्त—ब्रजेश पाठक

“यूपी विधानसभा बजट सत्र 2026 में लखनऊ में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी केंद्रों पर हुई कार्रवाई की जानकारी दी। हार्ट अटैक मरीजों के लिए ₹40,000 का इंजेक्शन और 50 से अधिक मेडिकल कॉलेज अधिकृत।: पढ़ें पूरी रिपोर्ट

हाईलाइट :

  • यूपी विधानसभा बजट सत्र 2026 में स्वास्थ्य सेवाओं पर चर्चा
  • निजी अस्पतालों व पैथोलॉजी केंद्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
  • कई अस्पताल सील, कुछ के लाइसेंस निरस्त
  • हार्ट अटैक मरीजों के लिए ₹40,000 का जीवनरक्षक इंजेक्शन उपलब्ध
  • 50+ मेडिकल कॉलेजों को उपचार के लिए अधिकृत किया गया
  • व्हाट्सएप ग्रुप से मरीजों की रियल टाइम मॉनिटरिंग

लखनऊयूपी विधानसभा बजट सत्र 2026 के दौरान सोमवार को राजधानी Lucknow में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अहम चर्चा हुई। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Brajesh Pathak ने सदन में प्रदेश के निजी चिकित्सालयों और निजी पैथोलॉजी केंद्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत किया।

डिप्टी सीएम ने बताया कि प्रदेशभर में चलाए गए विशेष जांच अभियान के तहत कई निजी अस्पतालों को सील किया गया है, जबकि कई संस्थानों के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी की गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

शिकायतों की भी होगी जांच

ब्रजेश पाठक ने कहा कि यह भी जांच की जाएगी कि कितने लोग निजी चिकित्सालयों से अवैध वसूली के उद्देश्य से शिकायत दर्ज कराते हैं। सरकार निष्पक्ष जांच के आधार पर ही कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

हार्ट अटैक मरीजों के लिए विशेष व्यवस्था

उपमुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि प्रदेश के प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में लगभग ₹40,000 कीमत का जीवनरक्षक इंजेक्शन उपलब्ध कराया गया है। हार्ट अटैक के मरीज को प्राथमिक उपचार के रूप में यह इंजेक्शन दिया जाता है, जिससे अगले 24 घंटे तक खतरा कम हो जाता है।

इसके बाद मरीज को निकटतम मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। प्रदेश के 50 से अधिक मेडिकल कॉलेजों को इस आपातकालीन उपचार प्रणाली के लिए अधिकृत किया गया है।

व्हाट्सएप ग्रुप से रियल टाइम मॉनिटरिंग

स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की निगरानी के लिए एक विशेष व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है। जैसे ही किसी प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हार्ट अटैक का मरीज पहुंचता है, उसकी रिपोर्ट ग्रुप में साझा की जाती है। इससे विशेषज्ञ डॉक्टर तुरंत उपचार संबंधी निर्देश दे पाते हैं।

सरकार का दावा है कि इन पहलों से प्रदेश में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार हुआ है।

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