“Varanasi Farmers Protest के दौरान केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान को प्रेस कॉन्फ्रेंस बीच में छोड़कर जाना पड़ा। काशी द्वार योजना के विरोध में 10 किसान हिरासत में लिए गए।”
हाइलाइट्स :
- वाराणसी में केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान के सामने किसानों का विरोध
- काशी द्वार आवास योजना रद्द करने की मांग
- हंगामे के बीच मंत्री को छोड़नी पड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस
- पुलिस ने 10 किसानों को हिरासत में लिया
- 800 एकड़ भूमि अधिग्रहण को लेकर किसान नाराज़
वाराणसी। Varanasi Farmers Protest ने शनिवार को उस समय तूल पकड़ लिया, जब केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान बजट पर चर्चा के लिए वाराणसी के सर्किट हाउस पहुंचे थे। भूमि अधिग्रहण और काशी द्वार आवास योजना के विरोध में पहुंचे किसानों ने जमकर हंगामा किया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुआ हंगामा
केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान बजट को लेकर प्रेस वार्ता करने पहुंचे ही थे कि बड़ी संख्या में किसान सर्किट हाउस पहुंच गए। किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और काशी द्वार योजना को रद्द करने की मांग करने लगे।
बीच में छोड़नी पड़ी प्रेस वार्ता
किसानों के उग्र विरोध के बीच स्थिति बेकाबू होती देख केंद्रीय मंत्री को प्रेस कॉन्फ्रेंस बीच में ही छोड़कर निकलना पड़ा। मंत्री के जाने से किसान और अधिक नाराज़ हो गए, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
10 किसान हिरासत में
हंगामे को शांत करने के लिए पुलिस ने 10 किसानों को हिरासत में लिया। बाकी किसानों को भी सर्किट हाउस परिसर में ही रोके रखा गया। पुलिस प्रशासन का कहना है कि बिना अनुमति इस तरह का प्रदर्शन कानून व्यवस्था के लिए खतरा है।
किसानों की क्या है मांग
यह पूरा मामला वाराणसी के मानपुर, मनौली, चकिन्दर और जददुपुर गांवों के किसान परिवारों से जुड़ा है। किसानों का कहना है कि वे अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं और काशी द्वार योजना को पूरी तरह रद्द किया जाए।
पुलिस का बयान
एसीपी कैंट नितिन तनेजा ने बताया कि बिना परमिशन प्रदर्शन करना और प्रेस कॉन्फ्रेंस को बाधित करना उचित नहीं है। इसी कारण किसानों को हिरासत में लिया गया है और उनके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
800 एकड़ जमीन अधिग्रहण की योजना
दरअसल, पिंडरा तहसील क्षेत्र के 10 गांवों में करीब 800 एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहण की योजना है। इस जमीन पर काशी द्वार आवास योजना के तहत हाईटेक कॉलोनी विकसित की जानी है। आवास विकास परिषद सात गांवों में सर्वे कर चुकी है, लेकिन चार गांवों में किसानों के विरोध के कारण काम रुका हुआ है।





