“बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में जनता ने रचा इतिहास — शाम 5 बजे तक 67.14% मतदान दर्ज। मतदान 70% से ऊपर पहुंच सकता है। क्या यह सत्ता विरोधी लहर का संकेत है या जनता का भरोसा? जानिए विस्तार से।
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पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में मतदाताओं ने जिस जोश और उत्साह के साथ मतदान किया, उसने सबको चौंका दिया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, शाम 5 बजे तक 67.14% मतदान दर्ज किया गया है, जबकि देर शाम तक यह आंकड़ा 70% के पार पहुंचने की पूरी संभावना है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इतना अधिक मतदान हमेशा बदलाव का संकेत होता है, लेकिन डिजिटल और सोशल मीडिया के मौजूदा दौर में अब यह तय करना आसान नहीं रह गया है कि यह जोश सत्ता विरोधी लहर का प्रतीक है या विकास के समर्थन में जनता का उत्सव।
ग्रामीण इलाकों में जहां महिलाओं और युवा मतदाताओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही, वहीं शहरी क्षेत्रों में भी मतदान का रुझान बढ़ा। कई बूथों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि 2020 के मुकाबले इस बार मतदान प्रतिशत में 5% तक की वृद्धि यह बताती है कि जनता सत्ता परिवर्तन या स्थायित्व को लेकर स्पष्ट मन बना चुकी है।
हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि सोशल मीडिया की सक्रियता और बूथ-लेवल मैनेजमेंट अब पारंपरिक ‘एंटी-इंकम्बेंसी थ्योरी’ को चुनौती दे रहे हैं। इसलिए तेज मतदान को अब केवल सरकार विरोधी लहर नहीं माना जा सकता।
बहरहाल, बिहार के इस ऐतिहासिक मतदान ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है और अब सभी की निगाहें तीसरे चरण के मतदान और 10 नवंबर को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं।
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