यादवों ने भी छोड़ा महागठबंधन का साथ: बिहार के नतीजों से यूपी की राजनीति में हलचल

“बिहार चुनाव यादव वोट बदलाव ने पूरे राजनीतिक समीकरण को बदल दिया है। 28 में से 15 यादव विधायक NDA को मिले, महागठबंधन को झटका लगा। मुस्लिम वोट भी Owaisi की AIMIM की ओर गया। इस बदलाव ने UP में सपा की एमवाई और पीडीए रणनीति पर चिंता बढ़ा दी है”

अभयानंद शुक्ल
समन्वय सम्पादक

बिहार में बदला राजनीतिक गणित, UP में बढ़ी चिंता

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे साफ होते ही कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
सबसे बड़ा राजनीतिक झटका आरजेडी नीत महागठबंधन (MGB) को यादव वोट की कमी के रूप में मिला है—
वह समुदाय जो दशकों से एमवाई (मुस्लिम–यादव) समीकरण की धुरी माना जाता रहा है।

इस बार यादवों ने भी महागठबंधन को पूरी तरह समर्थन नहीं दिया, और यही बदलाव उत्तर प्रदेश में भी राजनीतिक बेचैनी का कारण बन गया है।

28 में से 15 यादव विधायक NDA के खाते में—RJD के लिए बड़ा संकेत

बिहार में इस बार कुल 28 यादव विधायक जीते हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि—

NDA ने 15 यादव सीटें जीतीं, महागठबंधन को सिर्फ 12, जबकि 1 यादव विधायक बसपा से जीता है।

यह आंकड़ा यह साफ संदेश देता है कि यादव वोट का बड़ा हिस्सा RJD से खिसककर NDA के खेमे में चला गया है।

पहली बार RJD का ‘कोर वोट’ डगमगाया

राजद को यादव–मुस्लिम की “परंपरागत” राजनीति का सबसे बड़ा लाभार्थी माना जाता रहा है।
लेकिन इस चुनाव में— यादवों का भरोसा टूटा, मुसलमानों में भी नाराजगी दिखी और नतीजे NDA के पक्ष में भारी पड़े।

राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक,
यादव मतदाता इस बार जाति आधारित राजनीति छोड़कर “हिंदुत्व और एकजुटता” के नैरेटिव की ओर अधिक आकर्षित हुए। इस बार NDA को मुस्लिम वोट भी मिला—Owaisi फैक्टर बड़ा कारण बिहार चुनाव में मुस्लिम वोट भी एकतरफा RJD के पास नहीं गया। असदुद्दीन ओवैसी सीमांचल क्षेत्र में बड़ी ताकत बनकर उभरे।
उनकी पार्टी AIMIM ने इस बार 5 सीटें जीतीं, जबकि अभियान के दौरान यह नैरेटिव पूरी तरह प्रभावी रहा कि— मुसलमान तेजस्वी यादव से नाराज़ हैं। ओवैसी के “हक मांगने” वाले अभियान ने मुस्लिम वोट को RJD से दूर किया।

UP में भी असर—सपा में बेचैनी बढ़ी

बिहार के नतीजों का सीधा असर उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी पड़ा है।

UP में एमवाई वोट बैंक, और अब पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) रणनीति
पर चल रही सपा के लिए ये नतीजे चेतावनी हैं। यादवों के NDA की ओर झुकाव और मुस्लिम वोट के विभाजन से सपा के भीतर चिंता बढ़ गई है।

ओवैसी का UP में 200 सीटों पर लड़ने का ऐलान—सपा की मुश्किलें दोगुनी

AIMIM के UP अध्यक्ष शौकत अली ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी UP की 200 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

यह ऐलान सपा के लिए बड़ा खतरा है, क्योंकि— AIMIM की एंट्री = मुस्लिम वोट का बिखराव , BSP+AIMIM गठबंधन की संभावनाएँ = सपा की रणनीति कमजोर

यूपी में त्रिकोणीय मुकाबला = सपा गठबंधन के लिए नुकसान

पिछले बिहार चुनाव में AIMIM का बसपा के साथ गठबंधन भी UP में दोहराया जा सकता है।

UP में नई राजनीतिक समीकरण की आहट

विश्लेषकों के अनुसार—

यदि यादव वोट का एक हिस्सा NDA की ओर खिसकता है, और मुस्लिम वोट AIMIM या दूसरे दलों में बंटता है, तो सपा की पीडीए रणनीति कमजोर पड़ जाएगी। बिहार के नतीजों ने UP की विपक्षी राजनीति में गंभीर चिंतन की स्थिति पैदा कर दी है।

बिहार का यह चुनाव नतीजा सिर्फ बिहार की राजनीति का संकेत नहीं, बल्कि UP के राजनीतिक भविष्य के समीकरण की झलक भी देता है।= एमवाई फार्मूला, जो कभी अजेय माना जाता था, अब चुनौती के दौर से गुजर रहा है।

UP की राजनीति का अगला चरण अब AIMIM की रणनीति ,यादव समुदाय की नई राजनीतिक दिशा और बसपा–AIMIM के संभावित गठबंधन पर निर्भर करेगा।

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