“बॉक्स ऑफिस ट्रेंड 2026 में हिंदी सिनेमा में एक्शन, राष्ट्रवाद और जियोपॉलिटिकल फिल्मों का बोलबाला है। धुरंधर 2, सूबेदार और सैयारा जैसी फिल्मों के जरिए बदलते दर्शक मिजाज, फिल्म इंडस्ट्री की रणनीति और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन का विश्लेषण। ‘”
हाइलाइट्स :
- 2026 में एक्शन और राष्ट्रवादी फिल्मों का दबदबा
- धुरंधर 2 और सूबेदार जैसी फिल्मों से नई दिशा
- बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में 45-50% वृद्धि का अनुमान
- मध्यम बजट की फिल्में सिनेमाघरों से लगभग गायब
- रोमांटिक ड्रामा सैयारा भी रही सफल
मुंबई। साल 2026 में हिंदी सिनेमा की बड़ी फिल्मों की सूची देखें तो देशभक्ति वाले वॉर ड्रामा, स्पाई थ्रिलर, पौराणिक महाकाव्य और राष्ट्रवादी कथानक प्रमुखता से नजर आते हैं। समीक्षकों का मानना है कि मुख्यधारा सिनेमा अब सूक्ष्म सामाजिक कहानियों से हटकर भव्यता, टकराव और वैचारिक स्पष्टता की ओर बढ़ गया है।
पिछले साल की स्पाई-एक्शन फिल्म धुरंधर ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की। फिल्म में भारतीय एजेंटों को पाकिस्तान से जुड़े दुश्मनों का सामना करते हुए दिखाया गया था। वास्तविक सीमा तनाव की पृष्ठभूमि ने भी फिल्म के प्रभाव को बढ़ाया। अब इसका सीक्वल धुरंधर 2 मार्च में रिलीज के लिए तैयार है, जिसमें मुख्य भूमिका में Ranveer Singh नजर आएंगे।
बॉक्स ऑफिस पर उछाल
फिल्म प्रदर्शक अक्षय राठी का अनुमान है कि इस साल हिंदी बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में 45-50% तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि युवाओं की थिएटर उपस्थिति में 25% वृद्धि संभव है। ट्रेड विश्लेषकों का कहना है कि बड़े कैनवास और हाई-ऑक्टेन कंटेंट दर्शकों को फिर से सिनेमाघरों तक खींच रहा है।
फिल्म ट्रेड मैगज़ीन ‘कंपलीट सिनेमा’ के संपादक अतुल मोहन का तर्क है कि फिल्मों के विषय आज की राजनीतिक हवा से प्रभावित होते हैं। उन्होंने 2022 की ब्लॉकबस्टर The Kashmir Files का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी फिल्मों की सफलता ने निर्माताओं को समान विषयों पर दांव लगाने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, वे यह भी जोड़ते हैं कि ऐसी 10-15 फिल्मों में से केवल 1-2 ही व्यावसायिक रूप से सफल हो पाती हैं।
‘सूबेदार’ और ओटीटी की नई रणनीति
जहां बड़े पर्दे पर एक्शन और राष्ट्रवाद हावी है, वहीं ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी हाई-इंटेंस ड्रामा की ओर झुकाव दिख रहा है। निर्देशक Suresh Triveni, जो ‘तुम्हारी सुलू’ और ‘जलसा’ जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, अब एक्शन-ड्रामा सूबेदार लेकर आ रहे हैं।
इस फिल्म में Anil Kapoor एक रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर की भूमिका में हैं। फिल्म का ग्लोबल प्रीमियर 5 मार्च को Prime Video पर होगा। इसे वर्दी वाली जिंदगी के मनोवैज्ञानिक असर और तीव्र एक्शन के मिश्रण के रूप में पेश किया जा रहा है।
त्रिवेणी का मानना है कि मध्यम बजट की फिल्में सिनेमाघरों से लगभग गायब हो चुकी हैं, और बड़ी फिल्मों की सफलता ही इंडस्ट्री के आर्थिक पहिए को फिर से गति दे सकती है।
क्या ‘प्रोपेगेंडा’ बनाम ‘मनोरंजन’ की बहस?
निर्देशक Anil Sharma, जिन्होंने Gadar: Ek Prem Katha और Gadar 2 जैसी देशभक्ति फिल्मों का निर्देशन किया, मानते हैं कि दर्शक थिएटर में “मनोरंजन” के लिए जाते हैं, न कि “लेक्चर” सुनने के लिए। उनके अनुसार, तेज रफ्तार एक्शन और बड़े कैनवास वाली फिल्में आज के दौर की मांग हैं।
वहीं निर्देशक Ahmed Khan का कहना है कि अंततः फिल्म की गुणवत्ता ही उसकी सफलता तय करती है। उन्होंने 2025 की रोमांटिक ड्रामा Saiyaara और एक्शन फिल्म धुरंधर का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों अलग जॉनर की फिल्में थीं, लेकिन अपने-अपने स्तर पर सफल रहीं।
बदलता दर्शक, बदलता सिनेमा
विश्लेषकों के अनुसार, ओटीटी, सोशल मीडिया और एआई के दौर में दर्शकों का ध्यान खींचना पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में फिल्म निर्माता बड़े, भव्य और भावनात्मक रूप से तीव्र विषयों की ओर झुक रहे हैं।
हालांकि बहस जारी है—क्या यह बदलाव रचनात्मक जोखिमों को कम कर रहा है या फिर यह सिर्फ बाजार की मांग का प्रतिबिंब है?
2026 का बॉक्स ऑफिस इस सवाल का जवाब तय करेगा कि बड़े पर्दे पर एक्शन और राष्ट्रवाद का यह दौर अस्थायी ट्रेंड है या हिंदी सिनेमा की नई मुख्यधारा।
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