On the day of Navami, along with Goddess Siddhidatri, Lord Rama is also worshipped.

राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क  शाहजहांपुर : चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को रामनवमी मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीराम के साथ-साथ मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तिथि पर पूजा और व्रत करने से साधक को जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है।

भगवान श्रीराम का अवतरण
पुराणों के अनुसार, लंका नरेश रावण के अत्याचार से देवी-देवता और मनुष्य सभी त्रस्त थे। तब सभी देवगण भगवान विष्णु के पास सहायता मांगने गए। भगवान विष्णु ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे स्वयं धरती पर अवतार लेंगे। इसी कारण राजा दशरथ की पत्नी माता कौशल्या के गर्भ से भगवान श्रीराम का जन्म हुआ। श्रीराम को भगवान विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है।

रामनवमी पूजा का महत्व और विधि
रामनवमी के दिन घरों में भगवान श्रीराम की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन भगवान श्रीराम को पालने में सुलाने की परंपरा भी है। साथ ही प्रिय व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।

सभी कार्यों में सफलता पाने के लिए भगवान श्रीराम की विधिपूर्वक पूजा करें:

  • देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें।
  • चंदन का तिलक लगाकर श्रीराम स्तुति का पाठ करें।
  • ऐसा करने से साधक को सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
  • इस दिन अन्न और धन का दान अवश्य करें।

पूजा विधि

  1. प्रातःकाल स्नान कर भगवान श्रीराम का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  2. पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और चौकी सजाएं।
  3. चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर भगवान श्रीराम की प्रतिमा को परिवार सहित स्थापित करें।
  4. दीप प्रज्वलित कर पूजा में फल, मिष्ठान, फूल, अक्षत, चंदन, तुलसी पत्ता और पंचामृत अर्पित करें।
  5. भगवान श्रीराम के साथ माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की पूजा करें।
  6. राम चालीसा और राम स्तुति का पाठ करें।
  7. अंत में प्रसाद वितरित करें।

रामनवमी और नवरात्रि का संबंध
रामनवमी का संबंध माता के नवरात्रों से भी होता है। इस दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा करने से साधक को सिद्धियों की प्राप्ति होती है। अतः भक्तों को इस विशेष दिन विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ प्राप्त करना चाहिए।

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