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“भुवनेश्वर में फिल्म ‘चारिकांध’ की टीम ने उत्कलमणि गोपबंधु आदर्श वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ होली मनाई। भारत की पहली 37 मिनट की मध्यम अवधि की फिल्म ‘चारिकांध’ को देश-विदेश के 68 से अधिक फिल्म समारोहों में सराहना मिल चुकी है।

भुवनेश्वर। पवित्र होली पर्व के अवसर पर ओड़िया फिल्म ‘चारिकांध’ की टीम ने सामाजिक सरोकार का संदेश देते हुए एक वृद्धाश्रम में होली मनाई और वहां रह रहे वृद्धजनों के साथ उत्सव की खुशियां साझा कीं। स्थानीय उत्कलमणि गोपबंधु आदर्श वृद्धाश्रम में सुबह-सुबह फिल्म की पूरी टीम पहुंची और वृद्धजनों के चरणों में अबीर अर्पित कर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान कलाकारों ने उन्हें होली की शुभकामनाएं दीं और उनके साथ मिलकर उत्सव का आनंद लिया।

इस अवसर पर फिल्म के निर्माता अतिश कुमार राउत, निर्देशक विश्वनाथ रथ, अभिनेता शक्ति बराल, सुशील मिश्रा तथा अभिनेत्री शताब्दी सूर्यस्नाता सहित फिल्म से जुड़े कई अन्य सदस्य उपस्थित रहे। कलाकारों ने वृद्धाश्रम के निवासियों के साथ बातचीत की और होली से जुड़ी अपनी अविस्मरणीय स्मृतियां भी साझा कीं। इस आत्मीय वातावरण में रंगों और खुशियों का अनोखा संगम देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया।

ऋतुप्रिया प्रोडक्शन के बैनर तले निर्मित फिल्म ‘चारिकांध’ भारत की पहली 37 मिनट की मध्यम अवधि की फिल्म मानी जा रही है। ओडिशा में निर्मित इस फिल्म को देश और विदेश में व्यापक सराहना मिल रही है। 27 फरवरी को बड़े पर्दे पर रिलीज हुई इस फिल्म की मार्मिक कहानी दर्शकों के दिल को गहराई से छू रही है।

फिल्म की कथा वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों को दर्शाती है, जिसमें मृत्यु के बाद किसी को कंधा देने वाला भी न होने की पीड़ादायक स्थिति को बेहद संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया है। फिल्म देखते समय दर्शकों की आंखें नम हो जाती हैं और समाज के प्रति संवेदना का भाव स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आता है।

फिल्म का निर्माण अतिश कुमार राउत ने किया है, जबकि लेखन और निर्देशन की जिम्मेदारी विश्वनाथ रथ ने संभाली है। अभिनय में शक्ति बराल, शताब्दी सूर्यस्नाता, सुशील मिश्रा, गौरव महांति, शिवानी खरा, प्रभंजन मिश्रा, ऋद्धि परिड़ा, सुरुचिका महापात्र, नमिता साहू, नित्यानंद राउत, राज एस. पाढ़ी, सौम्य रंजन नायक, संस्कृति स्वाईं, एस. राजेंद्र तथा सौम्य आर. षडंगी सहित अनेक कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।

उल्लेखनीय है कि 37 मिनट की यह फिल्म अब तक 46 से अधिक राष्ट्रीय और 22 से अधिक अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित हो चुकी है और विभिन्न श्रेणियों में कई सम्मान भी प्राप्त कर चुकी है। सामाजिक संवेदना और मानवीय रिश्तों को केंद्र में रखने वाली इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों दोनों की ओर से भरपूर सराहना मिल रही है।

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