Skandmata: Glory and worship method of the fifth day of Navratri

राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क  लखनऊ : नवरात्रि के पावन पर्व में पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है। देवी स्कंदमाता भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता हैं और इन्हें मातृस्वरूपिणी माना जाता है। इस दिन मां कात्यायनी की उपासना करने से भक्तों को सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पूजा का महत्व और लाभ

मां स्कंदमाता की पूजा करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति, मानसिक स्थिरता और कष्टों से मुक्ति मिलती है। देवी का यह रूप संयम और साधना का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता है कि ब्रह्मचर्य व्रत का पालन कर मां की आराधना करने से इच्छित फल की प्राप्ति होती है।

ऐसे करें मां स्कंदमाता की पूजा

  1. मां के समक्ष दीप जलाएं और पुष्प अर्पित करें।
  2. पीले वस्त्र धारण कर पूजा करें, यह शुभ माना जाता है।
  3. केले का भोग लगाएं, जिससे जीवन में सुख-शांति आती है।
  4. “ॐ देवी स्कंदमातायै नमः” मंत्र का जाप करें।

ऐसा माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से माता स्कंदमाता की पूजा करता है, उसकी सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं और जीवन में उन्नति के द्वार खुलते हैं।

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