राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क गोला : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) गोला के अधीक्षक डॉ. गणेश कुमार के विरुद्ध की गई शिकायत के मामले में उत्तर प्रदेश लोकायुक्त के आदेश पर जिलाधिकारी द्वारा गठित त्रि-सदस्यीय जांच समिति ने अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंप दी है। जांच में सरकारी सेवा में रहते हुए निजी कंपनियों में निदेशक रहने और पद के दुरुपयोग से जुड़े गंभीर तथ्य सामने आए हैं। लोकायुक्त को प्राप्त शिकायत के क्रम में जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। समिति ने शिकायतकर्ता एवं डॉ. गणेश कुमार के लिखित बयान, बैंक अभिलेख, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पोर्टल, राज्य कर विभाग से प्राप्त दस्तावेज, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोला की नकद पुस्तिका, लोक वित्त प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) की प्रविष्टियां तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) से संबंधित बैंक खातों के विवरणों के आधार पर जांच की। जांच रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. गणेश कुमार सीएचसी गोला में अधीक्षक पद पर रहते हुए चिकित्सीय के साथ-साथ प्रशासनिक दायित्वों का भी निर्वहन कर रहे थे। इसी अवधि में वे पीएचआईके एंड कानेट ट्रेडर्स प्राइवेट लिमिटेड एवं फिक्स एंड सर्व ई-सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड नामक दो निजी कंपनियों में निदेशक भी थे। जांच के दौरान डॉ. गणेश कुमार ने स्वयं दोनों कंपनियों में निदेशक होने की पुष्टि की।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत सामग्री आपूर्ति के भुगतान का अधिकार अधीक्षक को प्राप्त था। इसी अधिकार का प्रयोग करते हुए वित्तीय वर्ष 2019-20 एवं 2020-21 के दौरान पीएचआईके एंड कानेट ट्रेडर्स प्राइवेट लिमिटेड को कुल 3 लाख 57 हजार 871 रुपये का भुगतान किया गया, जबकि उस समय डॉ. गणेश कुमार उक्त कंपनी के निदेशक भी थे। जांच समिति ने इसे पद एवं प्रभाव के दुरुपयोग की श्रेणी में माना है। हालांकि, मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के लिए बाध्य किए जाने के आरोप की पुष्टि हेतु पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य नहीं मिल सके। इसके बावजूद समिति ने स्पष्ट किया कि सरकारी सेवा में रहते हुए निजी कंपनियों में निदेशक के रूप में कार्य करना राजकीय कर्मचारी आचरण
नियमावली-2020 का उल्लंघन है।
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि डॉ. गणेश कुमार का पूर्व में प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण किया गया था, जिसे उन्होंने उच्च न्यायालय इलाहाबाद, लखनऊ खंडपीठ में चुनौती दी थी। न्यायालय द्वारा स्थानांतरण आदेश पर अग्रिम आदेश तक रोक लगाई गई है और मामला विचाराधीन है। इसके अतिरिक्त, औषधि निरीक्षक द्वारा नकली दवाओं की आपूर्ति से संबंधित एक वाद मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, लखीमपुर खीरी की अदालत में भी लंबित है, जिसमें डॉ. गणेश कुमार सहित अन्य अभियुक्त नामजद हैं। त्रि-सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपते हुए आवश्यक कार्रवाई की संस्तुति की है। अब इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई उच्च स्तर से किए जाने की संभावना जताई जा रही है।






















































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































