राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क लखनऊ : ‘‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) का यदि साक्ष्यों एवं नैतिकता के साथ विवेकपूर्ण उपयोग किया जाए तो यह छात्रों के समग्र विकास का प्रभावी माध्यम साबित हो सकता है’’, ये विचार हैं सी.एम.एस. प्रबन्धक प्रो. गीता गाँधी किंगडन के, जिसे उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित ‘ए.आई. फाॅर लर्निंग फोरम, इण्डिया’ के पैनल डिस्कशन व्यक्त किये। गूगल इंडिया के तत्वावधान में ‘द लीला पैलेस’, नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026’ के अन्तर्गत इस राष्ट्रीय मंच पर बोलते हुए प्रो. किंगडन ने कहा कि एआई में न केवल शैक्षणिक परिणामों को मज़बूत करने की क्षमता है अपितु यह छात्रों के वैश्विक दृष्टिकोण, रचनात्मकता एवं चिंतन पद्धति पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
कार्यक्रम में जयंत चैधरी, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एम.एस.डी.ई.) एवं राज्यमंत्री, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, ने बतौर मुख्य अतिथि अपनी उपस्थिति दर्ज करायी जबकि गूगल, डीपमाइंड और फैब इन्कार्पोरेशन के वरिष्ठ अधिकारियों, शिक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधियों, प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थानों एवं गैर-लाभकारी संगठनों के प्रतिनिधियों समेत बड़ी संख्या में मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, वरिष्ठ शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों और शिक्षकों ने ‘टीचिंग-लर्निंग’ प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए उभरती प्रौद्योगिकी के उपयोग पर गहन विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम में सिटी मोन्टेसेरी स्कूल का प्रतिनिधित्व प्रो. गीता गांधी किंगडन के नेतृत्व में किया गया, जिनके साथ सी.एम.एस. के कैम्ब्रिज सेक्शन की डीन सुषमा राजकुमार एवं सीएमएस राजाजीपुरम प्रथम कैम्पस के गणित शिक्षकअभिषेक शर्मा शामिल थे। इस अवसर पर ‘बियोन्ड एडाप्शन: एन एविडेंस-बेस्ड अप्रोच टुवड्र्स जेमिनी फाॅर टीचिंग एंड लर्निंग’ थीम पर बोलते हुए प्रो. किंगडन ने अनुसंधान और कक्षा की वास्तविकताओं पर आधारित नवाचार के प्रति सी.एम.एस. की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने गूगल डीपमाइंड द्वारा फैब एआई के सहयोग से सी.एम.एस. में किए गए एक ‘रैन्डमाइज्ड कंट्रोल्ड स्टडी’ के निष्कर्ष साझा किए। इस शोध में ‘एआई ट्यूटर्स’ (गूगल का जेमिनी गाइडेड लर्निंग) में छात्रों लर्निंग प्रक्रिया पर पड़ने वाले प्रभाव को जाँचा-परखा गया। उन्होंने इसे एक माॅडल के रूप में प्रस्तुत किया कि कैसे सटीक साक्ष्यों को ही तकनीक को अपनाने और उसके विस्तार का आधार बनना चाहिए।
पैनल चर्चा के दौरान प्रो. किंगडन शिक्षा के क्षेत्र में नवीन तकनीकी उन्नति को समाहित करने पर विस्तार से चर्चा की एवं शिक्षक सशक्तिकरण, व्यक्तिगत शिक्षण, नैतिक सुरक्षा उपायों एवं पूरी तैयारी के साथ कक्षाओं र्में ए.आइ. के कार्यान्वयन को रेखांकित किया।






















































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































