राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क गोला गोकर्णनाथ खीरी : बांकेगंज–कुकरा रोड स्थित हसनैन इंटर कॉलेज के सामने संचालित लखीमपुर हेल्थ केयर सेंटर को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है कि यह अस्पताल बिना पंजीकरण और बिना मान्यता प्राप्त चिकित्सक के लंबे समय से संचालित हो रहा है, जबकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। सूत्रों के अनुसार यदि लखीमपुर हेल्थ केयर सेंटर पूरी तरह वैध और पंजीकृत है, तो उसके मुख्य गेट पर ताला लगाकर अचानक बंद कर देने की नौबत क्यों आई। इससे यह आशंका गहराती है कि यहां किसी प्रकार की धोखाधड़ी और अवैध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल के सामने से प्रतिदिन प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की गाड़ियां गुजरती हैं, इसके बावजूद किसी प्रकार की जांच या कार्रवाई नहीं की गई। अस्पताल संचालक डॉ. विशाल कुमार पर खुद को BAMS एवं MD बताने का आरोप लगाया जा रहा है, जबकि सूत्रों का दावा है कि उनकी डिग्रियां संदिग्ध और फर्जी हैं। बताया जा रहा है कि समान नाम वाले दूसरे व्यक्ति के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर यह अस्पताल चलाया जा रहा है।
सूत्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बांकेगंज के कुछ सरकारी कर्मचारी व डॉक्टरों की कथित मिलीभगत से यह अवैध अस्पताल संचालित हो रहा है। बताया गया कि कुछ कर्मचारी काली रंग की ऑल्टो K10 कार से अस्पताल पहुंचते हैं, मरीज देखने के बाद पुनः CHC बांकेगंज लौट जाते हैं।
मामले को और गंभीर बनाते हुए सूत्रों ने भ्रूण हत्या जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन बिना पंजीकरण अस्पताल का संचालन अपने आप में कानून और चिकित्सा नियमों का खुला उल्लंघन माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार यह अस्पताल बीते लगभग एक वर्ष से अधिक समय से बिना पंजीकरण संचालित हो रहा है। पहले स्वास्थ्य विभाग द्वारा नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन उसके बावजूद कथित रूप से विभागीय सहमति से पुनः संचालन शुरू कर दिया गया।
इसी क्रम में जनता हॉस्पिटल लहरपुर से जुड़े एक चिकित्सक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विशाल नाम का एक युवक वहां नौकरी के लिए आया था और उसने डॉक्टर कृतिका वर्मा के कागजात दिखाकर 90 हजार रुपये लिए, जबकि संबंधित डॉक्टर को यह धनराशि नहीं दी गई। बाद में उसके MBBS दस्तावेज भी फर्जी पाए गए। सूत्रों का दावा है कि यह व्यक्ति स्वयं को BAMS MD बताता रहा, जबकि वास्तविकता में वह झोलाछाप चिकित्सक है पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोका जा सके।
























































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































