राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क हरदोई : क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र क़ासिमा बाद फार्म के डॉक्टर त्रिलोकी सिंह ने किसानों को फसल अवशेष प्रबन्धन (धान का पुआल) का उपयोग करने के उत्तम विकल्प बताते हुए कहा कि धान, गेंहू के पुआल को ना जलाएं उसके उपयोग के विभिन्न तरीके अपनाएं । विभिन्न फसलों की कटाई के बाद बचे हुए डंठल व गहराई के बाद बचे हुए पुआल, भूसा, तना तथा जमीन पर पड़ी हुई पत्तियों आदि को फसल अवशेष कहा जाता है । विगत एक दशक से खेती में मशीनों का प्रयोग बढ़ा है। साथ ही खेतीहर मजदूरों की कमी की वजह से भी यह एक आवश्यकता बन गई है । ऐसे में कटाई व गहराई के लिए कंबाईन हार्वेस्टर का प्रचलन बहुत तेजी से बढ़ा है, जिसकी वजह से भारी मात्रा में फसल अवशेष खेत में पड़ा रह जाता है । जिसका समुचित प्रबन्ध एक चुनौती है । किसान अपनी सहुलियत के लिए इसे जलाकर प्रबन्धन करते हैं। किसानों का कहना है कि कुछ फसलें जैसे कि धान-गेहूँ के फाने जल्दी मिट्टी में गलते नहीं हैं । साथ ही धान की रोपाई के समय खेत के किनारों पर इकट्ठे होने से मजदूरों के पैरों में चुभते हैं। अलग से अवशेष प्रबन्धन में धन, मजदूर, समय आदि की आवश्यकता होती है और दो फसलों के बीच उपयुक्त समय के अभाव की वजह से भी वे ऐसा करने के लिए बाध्य हैं। उनका यह भी कहना है कि फसल अवशेषों को जला देने से खेत साफ होता है। परन्तु इस तरह फसल अवशेष प्रबन्धन, खेत की मिट्टी, वातावरण व मनुष्य एवं पशुओं के स्वास्थ्य के लिए कितना घातक है इसका अंदाजा आज भी किसानों को नहीं है ।
फसल अवशेष जलाने के दुष्प्रभाव :
पोषक तत्वों की हानि : अनुमान है कि एक टन चावल के भूसे को जलाने से 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फॉस्फोरस, 25 किलोग्राम पोटेशियम और 1.2 किलोग्राम सल्फर के अलावा कार्बनिक कार्बन की हानि होती है ।
मिट्टी के गुणों पर प्रभाव: अवशेषों को जलाने से निकलने वाली गर्मी से मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है जिससे मिट्टी के लाभकारी जीव मर जाते हैं। बार-बार अवशेष जलाने से सूक्ष्मजीवों की आबादी पूरी तरह नष्ट हो जाती है और शीर्ष 0-15 सेमी मिट्टी प्रोफ़ाइल में एन नाइट्रोजन और कार्बन का स्तर कम हो जाता है, जो फसल की जड़ के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
ग्रीनहाउस और अन्य गैसों का उत्सर्जन: फसल अवशेष जलाना ग्रीन हाउस गैसों (जीएचजी) और अन्य रासायनिक और विकिरण संबंधी महत्वपूर्ण ट्रेस गैसों और एरोसोल जैसे मीथेन, कार्बनडाई ऑक्साइड, नाइट्रक ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड और अन्य हाइड्रोकार्बन का एक संभावित स्रोत है।
मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव- फसल अवशेष जलने से मनुष्य में विभिन्न तरह की बीमारियां हो जाती हें जय अस्थमा, आँख से सम्बंधित, फेफड़ों से सम्बंधित इत्यादि ।
किसान भाई धान के पुआल का उपयोग कैसे करें
खाद बनाने के लिए, मल्चिंग, बायोमास बिजली उत्पादन हेतु, पशु चारा हेतु बायोचार उत्पादन तथा कांच, चीनी मिटटी का सामान पैकिंग हेतु उपयोग ।
फसल अवशेष का खेत में प्रबन्धन कैसे करें:
फसल अवशेष को खेत खाद बनाने के लिए धान की फसल कटाई के बाद खेत की जुताई कर दें उसके करने के बाद 25 किलोग्राम यूरिया प्रति एकर के हिसाब से खेत में छिटक दें इस तरह से लगभग 25 से 30 दिन में बो पूरी तरह से खाद के रूप में परवर्तित हो जाता है इसे खेत में पोषक तत्व में वृधि होती है ।
कुछ शोध संस्थानों द्वारा कुछ फसल अवशेष को सड़ाने के लिए जैविक अपघटक बनाये है जैसे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ने पूसा डीकंपोज़र कैप्सूल तकनीक, हेलो-सीआरडी एवं बेस्ट डीकंपोज़र बनाया गया है ।

















































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































