राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क लखनऊ : डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी “डिजिटल समाज और मानवीय मूल्य: एआई युग में एकात्म मानव दर्शन का पुनरुद्धार” का रविवार को समापन हुआ। संगोष्ठी में भारत की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर जोर दिया गया। 800 से अधिक शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों की उपस्थिति में भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नैतिक मानकों को तय करने में अपनी भूमिका स्पष्ट की।
समापन सत्र की शुरुआत दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई। दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राचार्य प्रो. हेम चंद जैन ने कार्यशाला की रिपोर्ट प्रस्तुत की। संचालन प्रो. शैलेश मिश्रा ने किया।
मुख्य अतिथि केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि एआई का कानूनी और नैतिक ढांचा मानव कल्याण पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने हालिया वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि 86 देशों द्वारा समावेशी तकनीक समझौते पर हस्ताक्षर भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य मानव-केंद्रित डिजिटल क्रांति के नेतृत्व से जुड़ा है।
एकात्म मानव दर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में विरासत और विकास साथ-साथ चलने चाहिए।
बीबीएयू, लखनऊ के कुलपति प्रो. आर.के. मित्तल ने कहा कि तकनीक की गति को रोका नहीं जा सकता, लेकिन एआई के विकास को दिशा देना आवश्यक है। जेएनयू की कुलपति प्रो. शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने कहा कि एआई युग में शिक्षक की भूमिका मार्गदर्शक की है, जो सूचना के नैतिक उपयोग का विवेक देता है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. नारायणलाल गुप्ता ने कहा कि एआई समस्या नहीं, बल्कि उसके सही उपयोग के लिए एकात्म मानव दर्शन की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा शैक्षिक फाउंडेशन और दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के सहयोग से किया गया।
संगोष्ठी में संयुक्त संगठन मंत्री जी. लक्ष्मण, संगठनात्मक सचिव महेंद्र कपूर, अध्यक्ष नारायण लाल गुप्ता, महासचिव गीता भट्ट, वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
प्रदेशीय मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव के अनुसार उत्तर प्रदेश से गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद के कुलपति प्रो. सचिन माहेश्वरी, प्रदेश महामंत्री जोगेंद्र पाल सिंह, प्रदेश मंत्री प्रो. अनिल कुमार, इकाई महामंत्री प्रो. राजकुमार सोनकर, प्रो. सुनील कुमार, कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. उदयन मिश्रा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निर्मला यादव और प्रो. अमोद कुमार राय शामिल हुए।
प्लेनरी सत्र-3 ‘राष्ट्रीय सुरक्षा- एआई प्रेरित युग में आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा की चुनौतियां’ विषय पर केंद्रित रहा। मुख्य वक्ता रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर, रिटायर्ड मेजर जनरल आर.पी.एस. भदौरिया और सत्राध्यक्ष दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक कुमार नागावत रहे।
दो दिनों में 250 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। प्रो. मनोज खन्ना के धन्यवाद ज्ञापन और वंदे मातरम् के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

















































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































