राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क हरदोई : आदर्श विद्यालय में महाराजा बिजली पासी की जयंती पर बहुजन संकल्प महारैली में शामिल होने चंदशेखर आजाद पहुंचे थे। उन्हें सुबह 11:30 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचना था, लेकिन वो दो घंटे देरी से पहुंचे। इससे लोगों में बेचैनी बढ़ती रही, फिर भी भीड़ डटी रही और लोग उनके संबोधन का इंतजार करते रहे। 1:45 बजे वो जनसभा स्थल पहुंचे। उसके बाद सवा दो बजे संबोधन शुरू किया। बहुजन संकल्प महारैली में गरजे भीम आर्मी चीफ सांसद चंद्रशेखर आजाद, आरक्षण बचाना है तो एक हो जाओ, चंद्रशेखर आजाद ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा है आरक्षण बचाने और आजाद समाज पार्टी को मजबूत करने के लिए आपका एक होना जरूरी, जब आपकी जेब में पैसा होगा तो सब आपको सम्मान देंगे, बड़े बड़े धन्ना सेठ, पूंजीपति और नेता चुनाव के समय दलित समाज का वोट लेने आते हैं और उसके बाद दलित समाज की ओर मुड़कर नहीं देखते, आजाद भारत में संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर का मध्यप्रदेश में कुछ लोगों के द्वारा पुतला जलाया जा रहा है और सरकार हाथ पर हाथ रखकर तमाशा देख रही है, सरकार अगर ऐसे लोगों को गिरफ्तार नहीं करती है तो वह खुद पैदल यात्रा निकालकर मध्यप्रदेश पहुंचेंगे, उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में दीपू दास की हत्या पर उनका कलेजा फट रहा है, सत्ता में बैठे लोग बांग्लादेश में दीपूदास की हत्या पर तो घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं लेकिन देश में दलितों के साथ जो अत्याचार हो रहा है उस पर उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकल रहा है, सरकार आरक्षण खत्म करने की साजिश कर रही है ताकि लोगों को उनके अधिकारो से वंचित कर सके, भीम आर्मी चीफ ने कहा कि आजाद समाज पार्टी ने निजी क्षेत्र में भी आरक्षण लागू किए जाने की मांग की है, होमगार्ड, आंगनबाड़ी, पंचायत मित्र, आशा बहुओं, शिक्षामित्रों सहित तमाम पदों पर काम कर रहे लोगों का वेतन बढ़ाने की मांग भी सदन में की गई है महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचारों को लेकर चंद्रशेखर ने एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला दिया। कहा- देश में अपराध और रेप के मामलों में सबसे अधिक पीड़ित यही वर्ग हैं, लेकिन इस पर न सरकार बोलती है न मीडिया। बांग्लादेश की घटना पर चुनिंदा लोग संवेदना दिखाते हैं। अपने देश में जो कुछ हो रहा है उसपर लोग चुप्पी साध लेते हैं।
आरक्षण, निजी क्षेत्र में हिस्सेदारी, पुलिस सुधार, भूमिहीनों को ज़मीन और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चंद्रशेखर ने आंदोलन की बात कही। साथ ही कहा कि निजी क्षेत्र में आरक्षण को लेकर हम लोग जनवरी से पदयात्रा निकालेंगे।महापुरुषों के अपमान पर चंद्रशेखर ने कहा-एक लड़ाई आज़ादी की थी, अब लड़ाई अधिकारों की है और यह लड़ाई भाईचारे के साथ ही जीती जाएगी।
रैली में जगह कम पड़ने पर कई लोग पेड़ों और आसपास की छतों पर चढ़कर सभा देखने की कोशिश करते दिखे। छतों पर बड़ी संख्या में लोगों के डटे रहने से किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रही।






















































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































