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यूपी बना नंबर वन ई-श्रम पोर्टल पंजीकरण में। उत्तर प्रदेश में 8.42 करोड़ असंगठित श्रमिक रजिस्टर्ड, 52.62% महिलाएं शामिल। जानें जिला लखनऊ सहित प्रदेश की ताजा श्रम विभाग रिपोर्ट।

हाइलाइट्स:

  • उत्तर प्रदेश ई-श्रम पोर्टल पंजीकरण में देश में प्रथम
  • कुल 8.42 करोड़ असंगठित श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन
  • महिलाओं की भागीदारी 52.62%, पुरुष 47.38%
  • 18-40 आयु वर्ग के 63.39% श्रमिक पंजीकृत
  • बिहार दूसरे, पश्चिम बंगाल तीसरे स्थान पर

लखनऊ। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने की दिशा में उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण के मामले में प्रदेश देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। दिसंबर 2025 तक राज्य में कुल 8,42,08,154 (8.42 करोड़ से अधिक) असंगठित श्रमिकों का पंजीकरण हो चुका है।

यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक सक्रियता बल्कि श्रमिकों में बढ़ती जागरूकता और डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रति विश्वास को भी दर्शाती है।

महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक

पंजीकृत श्रमिकों के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि कुल पंजीकरण में 52.62 प्रतिशत महिलाएं और 47.38 प्रतिशत पुरुष शामिल हैं।
यह आंकड़ा दर्शाता है कि प्रदेश में महिला श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने की दिशा में सकारात्मक बदलाव आया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वयं सहायता समूहों, पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियानों और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से किए गए पंजीकरण अभियान ने इसमें अहम भूमिका निभाई है।

युवा श्रमिकों का बढ़ता रुझान

आयु वर्ग के अनुसार पंजीकरण के आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • 63.39% श्रमिक 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के
  • 20.90% श्रमिक 40 से 50 वर्ष आयु वर्ग के
  • 15.65% श्रमिक 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि युवाओं में डिजिटल माध्यम से सरकारी योजनाओं से जुड़ने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है।

कृषि क्षेत्र में सर्वाधिक पंजीकरण

प्रदेश में सर्वाधिक पंजीकरण कृषि एवं कृषि से जुड़े कार्यों में लगे श्रमिकों का हुआ है। इसके अलावा निर्माण कार्य, घरेलू कामगार, रिक्शा चालक, स्ट्रीट वेंडर, दिहाड़ी मजदूर, कारीगर और छोटे व्यापार से जुड़े श्रमिक भी बड़ी संख्या में पोर्टल से जुड़े हैं।

ई-श्रम पंजीकरण के बाद श्रमिकों को एक यूनीक 12 अंकों का ई-श्रम कार्ड प्रदान किया जाता है, जिसके माध्यम से वे दुर्घटना बीमा, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और भविष्य में लागू होने वाली श्रमिक कल्याण योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं।

अन्य राज्यों की स्थिति

राष्ट्रीय स्तर पर तुलना करें तो उत्तर प्रदेश के बाद:

  • बिहार – 321.67 लाख पंजीकरण
  • पश्चिम बंगाल – 265.41 लाख
  • मध्य प्रदेश – 191.81 लाख
  • महाराष्ट्र – 182.73 लाख

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि यूपी ने अन्य बड़े राज्यों से काफी आगे निकलकर शीर्ष स्थान हासिल किया है।

सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से सरकार असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार कर रही है। इससे भविष्य में आपदा, महामारी या आर्थिक संकट की स्थिति में सीधे लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाना आसान होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी प्रकार पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ती रही तो असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को पेंशन, बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने में बड़ी सफलता मिल सकती है।


उत्तर प्रदेश का ई-श्रम पोर्टल पर शीर्ष स्थान प्राप्त करना प्रशासनिक दक्षता, डिजिटल पहुंच और श्रमिकों की बढ़ती भागीदारी का प्रमाण है। खासकर महिलाओं की अधिक भागीदारी राज्य के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

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