
राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क गोला गोकर्णनाथ खीरी : क्षेत्र में शराब माफिया ने अपनी जड़ें इतनी गहराई से जमा ली हैं कि अब यह क्षेत्र अवैध शराब कारोबार का एक बड़ा केंद्र बन गया है। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि गांवों के शरीफ लोग भी सूर्यास्त के बाद निकलने में परहेज करने लगे हैं। अवैध शराब के नेटवर्क पर कोई लगाम न कसे जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में धड़ल्ले से हो रहे अवैध कच्ची शराब उत्पादन एवं बिक्री के कारण आये दिन कोई न कोई विवाद होता रहता है। इस कारोबार में लगे धंधेबाजों का नेटवर्क इतना तेज है कि आबकारी विभाग के पहुंचने से पहले ही उनके यहां यह सूचना पहुंच जाती है और वे अपना धंधा समेट लेते हैं। इस नेटवर्क में कहीं न कहीं खाकी की भी मिलीभगत होने की क्षेत्र में आम चर्चा जोरों पर है।
पूरे क्षेत्र में जगह-जगह पर अवैध कच्ची शराब उत्पादन करने एवं बेचने का धंधा ऐसे ही नहीं फल-फूल रहा है। इसकी रोकथाम के लिए आबकारी विभाग और पुलिस की कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित रहने के कारण क्षेत्र के तमाम गांवों में कच्ची दारू का उत्पादन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। वहीं पुलिस के आला अधिकारी जब भी जिले की पुलिसिंग को लेकर समीक्षा करते हैं तो उस दौरान कच्ची शराब की बिक्री को बंद करने के लिए ताकीद कराये जाने पर पुलिस दो-तीन दिन अभियान चलाकर अधिकारियों को बताने की कोशिश करती है कि वह कच्ची शराब पर नकेल कसने के लिए पूरी तरह से सक्रिय हैं। उसके बाद संबंधित विभागों का रवैया पुराने ढर्रे पर लौट आता है। इसके चलते हैदराबाद थाना की अजान पुलिस चौकी क्षेत्र में खुले आम हो रही अवैध कच्ची शराब की बिक्री से जहां गांवों का माहौल खराब हो रहा है, वहीं युवा पीढ़ी भी नशे की आदी होती जा रही है। ऐसा भी नहीं है कि अवैध कच्ची शराब के कारोबार की जानकारी पुलिस प्रशासन को न हो, लेकिन जानकारी के बावजूद भी अवैध शराब की बिक्री पर लगाम न लगाने से विभाग की कार्य प्रणाली सवालों के घेरे में खड़ी होती दिखाई दे रही है।
पुलिसकर्मियों की सांठ-गांठ से क्षेत्र के ग्राम तकिया, लोहरैया, संकेथू सहित तमाम ऐसे स्थान हैं जहां पर अवैध शराब की बिक्री बेरोकटोक जारी है। यहां मदिरा प्रेमियों को गांव में बिना मशक्कत किए ही 75 और 90 वाली देसी शराब मात्र 20 रुपये में बेचे जाने से अवैध कच्ची शराब की बिक्री बढ़ती जा रही है, जिसमें युवा वर्ग शराब की लत में जकड़ता जा रहा है कहा तो यह भी जा रहा है कि पुलिस की मिली भगत से ही यह धंधा फल फूल रहा है। यदि ऐसा न होता तो पुलिस इस अवैध कारोबार को कब का बंद करा दी होती।