
राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क हरदोई : रिश्वत लेने के आरोप में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पूर्व जिला अध्यक्ष को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की एंटी करप्शन ब्रांच ने हिरासत में लिया है! आरोप है कि उन्होंने सरकारी योजना के तहत बैंक से ऋण दिलाने के नाम पर एक महिला से हजारों रुपए की घूस ली! पीड़िता की शिकायत पर सीबीआई ने जाल बिछाकर कार्रवाई की और आरोपी को गिरफ्तार किया!
प्राप्त जानकारी के अनुसार बघौली थाना क्षेत्र की अछरामऊ गांव निवासिनी सीमा ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत ₹5 लाख का लोन पास करने के लिए बैंक ऑफ़ बड़ौदा में आवेदन किया था! आरोप है कि ऋण स्वीकृत कराने के नाम पर कछौना थाना क्षेत्र निवासी व बहुजन समाज पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष सुरेश चंद चौधरी ने महिला से ₹50 हजार की रिश्वत ली और आगे की मांग कर रहे थे! बसपा नेता बैंक ऑफ़ बड़ौदा के बीसी पॉइंट के संचालक भी हैं! अपने को ठगता देख पीड़िता ने इसकी शिकायत सीबीआई से की!
महिला की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सीबीआई ने योजना बनाकर विकासखंड कछौना के मुसलमानाबाद में पार्टी की बैठक कर रहे बसपा नेता सुरेश चंद्र चौधरी व उनके एक साथी को हिरासत में लेकर रेलवे स्टेशन बालामऊ के रनिंग रूम संख्या 03 में ले आई! जहां लगभग छः घंटे तक पूछताछ की गई पूछताछ के समय रनिंग रूम में पीड़िता भी उपस्थित रही और अपने बयानों पर अड़ी रही! कड़ी व लंबी पूछताछ के बाद देर रात सीबीआई टीम बसपा नेता को अपने साथ लखनऊ ले गई! हालाकि उनके साथी को छोड़ दिया गया! टीम अपने साथ सभी संबंधित अभिलेख व अन्य संदिग्ध सामग्री ले गई है!
सीबीआई के अधिकारियों ने बताया कि बसपा नेता की गिरफ्तारी रिश्वत के आरोप में हुई है साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं पूछताछ के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी! इसके साथ ही साथ पता लगाया जा रहा है कि इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा यह कहीं बड़े नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं ? पूछताछ और जाँच के बाद जरूरत पड़ने पर अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं!
वही अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन करते हुए बसपा नेता ने बताया कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है!
इस कार्यवाही से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है! स्थानीय लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ हुई इस कार्यवाही को महत्वपूर्ण मान रहे हैं इसके साथ ही बैंक की सुचिता पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं! लोगों का कहना है कि बैंक अधिकारियों की मिलीभगत के बिना ऐसे रिश्वतखोरी के रैकेट को चलाना संभव नहीं है!

































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































