Farmers' seminar organised by Bajaj Hindustan Sugar Mill Gola in village Jatpura
  • March 15, 2026
  • kamalkumar
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राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क गोला गोकर्णनाथ खीरी : बजाज हिन्दुस्थान शुगर लिमिटेड चीनी मिल गोला क्षेत्र में बसंतकालीन गन्ना बुवाई के मद्देनज़र किसानों को उन्नत तकनीकों की जानकारी देने के उद्देश्य से ग्राम जटपुरा में एक वृहद गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक आशुतोष मधुकर, चीनी मिल के वरिष्ठ महाप्रबंधक (गन्ना) पी.एस. चतुर्वेदी तथा राष्ट्रीय जैविक कृषि मिशन के संयोजक मनोज दीक्षित सहित मिल के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे गोष्ठी को संबोधित करते हुए ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक आशुतोष मधुकर ने किसानों को बसंतकालीन गन्ना बुवाई में नई एवं उन्नतशील प्रजातियों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि गन्ना प्रजाति को० 0238 रेड रॉट रोग से गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है, इसलिए इसकी बुवाई में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इसके स्थान पर उन्नतशील प्रजातियाँ को० 0118, 15023 तथा कोलख० 14201 की बुवाई करने के लिए प्रेरित किया। वहीं निचले क्षेत्रों के लिए को० 98014 एवं कोलख० 94184 प्रजातियाँ उपयुक्त बताई गईं। उन्होंने किसानों को हरियाणा 119 (एचआर), कोशा० 91269 तथा पीबी० 95 जैसी अनामित व अस्वीकृत प्रजातियों की बुवाई न करने की सलाह भी दी इस दौरान वरिष्ठ महाप्रबंधक (गन्ना) पी.एस. चतुर्वेदी ने किसानों को गन्ना बुवाई के समय बीज के चयन में सावधानी बरतने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि बीज के रूप में गन्ने के ऊपरी दो-तिहाई हिस्से का प्रयोग करना चाहिए तथा चार फीट की दूरी पर ट्रेंच विधि से बुवाई करने से पैदावार में वृद्धि होती है उन्होंने बताया कि गहरी जुताई करने से मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है और मृदा में वायु संचार बेहतर होता है, जिससे फसल की बढ़वार अच्छी होती है और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है। भूमि उपचार के लिए ट्राइकोडर्मा चीनी मिल द्वारा अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसके प्रयोग से मिट्टी में मौजूद हानिकारक फफूंद नष्ट हो जाते हैं और भूमि भुरभुरी बनती है। इसके अलावा बीज उपचार के लिए फफूंदीनाशक थायोफिनेट मिथाइल भी अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्नतशील गन्ना प्रजातियों का शुद्ध और निरोग बीज सुरक्षित किया गया है, जिसे चीनी मिल के माध्यम से किसानों को वितरित करने का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही मिलगेट एवं क्रय केंद्रों पर खुली खरीद की जा रही है। जिन किसानों के पास आपूर्ति योग्य गन्ना अवशेष है, वे अपना कोड नंबर देकर पर्ची प्राप्त कर मिलगेट या क्रय केंद्रों पर गन्ना आपूर्ति कर सकते हैं। इसके बाद चीनी मिल पेराई सत्र 2025-26 के लिए अंतिम रूप से बंद कर दी जाएगी इस अवसर पर राष्ट्रीय जैविक कृषि मिशन के संयोजक मनोज दीक्षित ने किसानों को जैविक खेती के तरीकों और उससे होने वाले लाभों की विस्तृत जानकारी दी।

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