The court ordered the cancellation of sections of attempt to murder and incitement.
  • March 18, 2026
  • kamalkumar
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राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क हरदोई : शहर में रंजना होटल के बाहर अधिवक्ताओं के साथ हुई मारपीट मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रिचा वर्मा ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मामले में लगाई गई हत्या का प्रयास और हत्या के लिए उकसाने की धाराओं को आधारहीन मानते हुए हटाने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले से रंजना होटल के मालिक अनुराग शुक्ला समेत चार आरोपियों को बड़ी राहत मिली है।

बीती चार जनवरी की रात शहर में रंजना होटल के बाहर विवाद हो गया था। अधिवक्ता दीपक पाल ने शहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोपियों में रंजना होटल के मालिक अनुराग शुक्ला, जतिन उर्फ शशांक त्रिवेदी, रामकृपाल और उमाकांत कश्यप शामिल थे। प्राथमिकी के आधार पर विवेचक ने चारों के खिलाफ गंभीर धाराओं में रिमांड मांगी थी। इसके बाद इन सभी को जेल भेज दिया गया था। इसमें एक आरोपी की जमानत हो चुकी है जबकि तीन जेल में बंद हैं। इसके बाद पुलिस ने धारदार हथियार से चोट पहुंचाने समेत दो धाराओं को बढ़ाने का प्रार्थना पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं विवेक मिश्रा और आलोक अवस्थी ने इसका विरोध करते हुए मेडिकल साक्ष्य और सीसीटीवी फुटेज पेश किए। न्यायालय ने पत्रावली का अवलोकन करते हुए बताया कि अधिवक्ता दीपक पाल को आईं चोटें प्राणघातक नहीं थीं। मरीज सामान्य रूप से घायल था इसलिए तीन दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। नेत्र रोग विशेषज्ञ ने भी आंखों की जांच को सामान्य बताया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सीसीटीवी फुटेज में रुपयों के लेनदेन को लेकर बहस और गाली-गलौज सुनाई दे रही है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अभियुक्त पेशेवर होटल व्यवसायी है और बिना किसी रंजिश के ग्राहकों को जान से मारने का उनका कोई इरादा साक्ष्यों से प्रतीत नहीं होता।सुप्रीम कोर्ट के फैसले की दी नजीर

सीजेएम रिचा वर्मा ने कहा कि रिमांड स्वीकार करने से पहले मजिस्ट्रेट को अभियुक्त की स्वतंत्रता की रक्षा की आवश्यकता को भी देखना चाहिए। कोर्ट ने माना कि धारा 109 (1) हत्या का प्रयास और 110 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) गंभीर चोट पहुंचाना को लगाए रखने का कोई ठोस आधार नहीं है। हालांकि, नाक में फ्रैक्चर के आधार पर धारदार हथियार से वार किए जाने और जानबूझकर चोट पहुंचाने की धाराएं बरकरार रखी हैं।

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