
राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क। नयी दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ष्मन की बातष् के 123वें एपिसोड के माध्यम से देशवासियों से संवाद किया। इस एपिसोड की शुरुआत उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की चर्चा से की और कार्यक्रम के अंत तक कई विषयों पर अपने विचार साझा किए और इमरजेंसी की 50वीं वर्षगांठ का जिक्र करते हुए पीएम मोदी बोलेए इमरजेंसी लगाने वालों ने न सिर्फ हमारे लोकतंत्र की हत्या कीए बल्कि न्यायपालिका को भी अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की। उस दौर में देशभर में लोगों को बड़े पैमाने पर प्रताड़ित किया गया। इसके ऐसे कई उदाहरण हैंए जिन्हें कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष भी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरी दुनिया में बड़े उत्साह और भागीदारी के साथ मनाया गया। उन्होंने याद दिलाया कि यह सिलसिला 10 साल पहले शुरू हुआ था और अब हर साल यह आयोजन पहले से ज्यादा भव्य और प्रभावशाली होता जा रहा है। पीएम ने यह भी कहा किए श्यह इस बात का संकेत है कि योग को अब अधिक लोग अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। पीएम मोदी ने इस बार की थीम एक पृथ्वीए एक स्वास्थ्य के लिए योग को बेहद खास बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक नारा नहींए बल्कि वसुधैव कुटुंबकम की भावना को दर्शाने वाला एक वैश्विक संदेश है। प्रधानमंत्री ने योग दिवस पर देश.विदेश में हुए आयोजन की कई खास तस्वीरों और प्रयासों का जिक्र करते हुए बोले हिमालय की बर्फीली चोटियों पर आईटीबीपी के जवानों ने योग किया। गुजरात के वडनगर में ;इक्कीस सौ इक्कीसद्ध 2121 लोगों ने एक साथ भुजंगासन कर नया रिकॉर्ड बनाया। न्यूयॉर्कए लंदनए टोक्यो और पेरिस जैसे शहरों से योग की तस्वीरें आईं जिनमें शांति और स्थिरता की झलक दिखी। भारतीय नौसेना के जहाजों पर भी योग किया गया। तेलंगाना में 3000 दिव्यांगजनों ने सामूहिक रूप से योग कर सशक्तिकरण का उदाहरण प्रस्तुत किया। दिल्ली में लोगों ने स्वच्छ यमुना का संकल्प लेते हुए यमुना तट पर योग किया। जम्मू.कश्मीर के चिनाब ब्रिज ;दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुलद्ध पर भी योग आयोजन हुआ। विशाखापत्तनम में तीन लाख लोगों ने समुद्र तट पर एक साथ योग किया। वहींए 2000 से अधिक आदिवासी छात्रों ने 108 मिनट तक 108 बार सूर्य नमस्कार कर अनुशासन और समर्पण का परिचय दिया। पीएम मोदी ने धार्मिक यात्राओं की बात करते हुए कहाए जब कोई व्यक्ति तीर्थयात्रा पर निकलता है तो उसके मन में पहला भाव आता है. चलोए बुलावा आया है। यही भावना हमारी आस्था का आधार है। पीएम ने बताया कि तीर्थयात्राएं केवल प्रभु से जुड़ने का ही माध्यम नहींए बल्कि यह सेवाए अनुशासन और आपसी भाईचारे का भी पर्व होती हैं। उन्होंने भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि देशभर में लाखों श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं और यह श्एक भारत.श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूती देती है। प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि लंबे समय बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा का पुनः शुभारंभ हुआ है। उन्होंने कहा कि कैलाश को हिंदूए बौद्ध और जैन सभी परंपराओं में श्रद्धा का केंद्र माना जाता है। साथ ही उन्होंने बताया कि 3 जुलाई से अमरनाथ यात्रा शुरू होने जा रही है और सावन का पवित्र महीना भी अब ज्यादा दूर नहीं है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं भी दीं।