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भारत रूस से तेल खरीदेगा या नहीं? ट्रंप के दावे के बाद विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

हाइलाइट्स :

  • भारत की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता: विदेश मंत्रालय
  • रूस और वेनेजुएला से तेल पर भारत का रुख स्पष्ट
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार हालात के अनुसार होंगे फैसले
  • ट्रंप के दावे पर भारत ने नहीं बदली नीति

नई दिल्ली। भारत रूस से तेल खरीदेगा या नहीं, इस सवाल पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बाद विदेश मंत्रालय ने स्थिति साफ कर दी है। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश की ऊर्जा नीति किसी बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर तय की जाती है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता देश की एनर्जी सिक्योरिटी है। उन्होंने कहा कि बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल और वैश्विक बाजार स्थितियों को देखते हुए ऊर्जा स्रोतों में विविधता (Diversification) भारत की रणनीति का अहम हिस्सा है।

रणधीर जायसवाल ने कहा, “ऑब्जेक्टिव मार्केट कंडीशंस और इंटरनेशनल सिचुएशन को देखते हुए भारत अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाए रखेगा। सभी फैसले इसी सिद्धांत के आधार पर लिए जाएंगे।”

दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर राजी हो गया है और वह वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। ट्रंप ने यह बयान भारत-अमेरिका ट्रेड डील और 18 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा के साथ दिया था।

हालांकि, विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के इस दावे को सीधे तौर पर स्वीकार नहीं किया। प्रवक्ता ने वेनेजुएला को लेकर कहा कि वह भारत का लंबे समय से ऊर्जा क्षेत्र में साझेदार रहा है। भारत ने 2019-20 तक वेनेजुएला से कच्चा तेल आयात किया था, जिसे प्रतिबंधों के चलते रोका गया। बाद में 2023-24 में आयात फिर शुरू हुआ, लेकिन प्रतिबंध लगने के कारण दोबारा रोकना पड़ा।

विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत कमर्शियल और आर्थिक फायदे को ध्यान में रखते हुए किसी भी देश से तेल खरीद पर विचार करने के लिए तैयार है।

ट्रेड डील पर बात करते हुए रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई बातचीत के बाद आपसी टैरिफ में कमी पर सहमति बनी। इससे मेड-इन-इंडिया उत्पादों के अमेरिकी निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और भारत में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

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