
राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क लखनऊ : क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की वर्ष 2024-25 की 27वीं बैठक सचिव, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद एस.के. सिंह की अध्यक्षता में 21 मार्च 2025 को परिषद के सभाकक्ष में सम्पन्न हुई। बैठक में प्रदेश के किसानों के लिए आगामी दो सप्ताह के कृषि प्रबंधन हेतु महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।
मौसम पूर्वानुमान (21-27 मार्च, 2025)
भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त पूर्वानुमान के अनुसार, 22 मार्च तक प्रदेश के विंध्य, पूर्वी मैदानी और मध्य मैदानी कृषि जलवायु क्षेत्रों में तड़ित झंझावात (वज्रपात), झोंकेदार हवाएं (30-40 किमी प्रति घंटा) और हल्की वर्षा की संभावना है।
इस अवधि में प्रदेश के भाभर तराई क्षेत्र के पूर्वी भाग में अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास रहेगा, जबकि दक्षिण-पश्चिमी अर्द्धशुष्क मैदानी क्षेत्र के उत्तरी भाग में यह सामान्य से 2-4 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है। अन्य कृषि जलवायु अंचलों में तापमान 1-2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की संभावना है।
मौसम दृष्टिकोण (28 मार्च – 03 अप्रैल, 2025)
इस अवधि में प्रदेश के सभी कृषि जलवायु अंचलों में कोई प्रभावी वर्षा होने की संभावना नहीं है। हालांकि, उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र और संलग्न पूर्वी मैदानी क्षेत्र के उत्तरी भाग में अधिकतम तापमान सामान्य से 2-4 डिग्री सेल्सियस अधिक और अन्य अंचलों में 1-2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की संभावना है।
ओलावृष्टि से फसल क्षति की रिपोर्ट
01 मार्च से 21 मार्च 2025 तक ओलावृष्टि के कारण प्रदेश में 4,378 किसानों की 1,244.09 हेक्टेयर फसल क्षतिग्रस्त हुई।
- कानपुर नगर – 1 किसान की 0.145 हे. फसल
- मथुरा – 4,367 किसानों की 1,241 हे. फसल
- सहारनपुर – 10 किसानों की 2.94 हे. फसल
किसानों के लिए महत्वपूर्ण कृषि सुझाव
➡ गेहूं और जौ की कटाई के बाद फसल के गट्ठरों को बिजली के तारों के नीचे न रखें ताकि आग से बचाव हो सके।
➡ तापमान वृद्धि को देखते हुए देर से बोई गई गेहूं की फसल में 0.5-1% पोटैशियम नाइट्रेट का पर्णीय छिड़काव पुष्पावस्था और दाना भरने की अवस्था में करें।
➡ खेत में नमी बनाए रखने के लिए 15-20 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।
जायद फसल प्रबंधन
✅ जायद मक्का की फसल को 5-6 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है, इसलिए 10-12 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें और खरपतवार नियंत्रण के लिए निराई-गुड़ाई करें।
✅ मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करें, यदि परीक्षण न हो तो 80:40:40 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाश की दर से उर्वरक डालें।
✅ लाइन में बुवाई करें ताकि अंतः शस्य क्रियाएं आसानी से हो सकें।
फसल भंडारण एवं रोग नियंत्रण
✔ गेहूं की फसल पकने की अवस्था में है, इसलिए फसल कटाई-मड़ाई के बाद अनाज को अच्छी तरह से सुखाएं ताकि नमी 10% से अधिक न रहे।
✔ ग्रीष्मकालीन मूंगफली की बुवाई के बाद पहली सिंचाई जमाव पूरा होने पर करें, तथा 15-20 दिन बाद निराई-गुड़ाई करें।
✔ उड़द में थ्रिप्स कीट की निगरानी करें और प्रथम सिंचाई से पहले जैविक नीम ऑयल का छिड़काव करें।
✔ दलहनी फसलों में बीज को 200 ग्रा./10 कि.ग्रा. राइजोबियम कल्चर से उपचारित कर बुवाई करें।
✔ जायद सूरजमुखी में विरलीकरण कर पौधों के बीच 15-20 सेमी की दूरी सुनिश्चित करें।
✔ गन्ने में काला चिकटा कीट की रोकथाम के लिए 5 लीटर क्लोरपायरीफॉस को 800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
फलों और पशुपालन के लिए सुझाव
🌳 आम के भुनगा कीट की रोकथाम के लिए इमिडाक्लोप्रिड 30.5% एस.सी. (0.3 मिली/लीटर) एवं प्रोफेनोफास 50% ई.सी. (1 मिली/लीटर) का छिड़काव करें।
🌳 आम के पाउडरी मिल्ड्यू रोग से बचाव के लिए डाइनोकैप (कैराथीन) 1.0 मिली/लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
🐄 पशुपालन में सावधानी:
✔ खुरपका-मुंहपका (FMD) रोग का टीकाकरण पशु चिकित्सालयों में निःशुल्क कराया जा रहा है।
✔ बकरियों में PPR (पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स) का टीकाकरण भी निःशुल्क उपलब्ध है।
कृषकों को सलाह दी जाती है कि वे मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाएं और इन सुझावों का पालन करें ताकि फसल उत्पादन और गुणवत्ता को बनाए रखा जा सके।