राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ । बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ विपक्ष की तरफ से संसद भवन परिसर में जोरदार तरीके से प्रदर्शन किया गया। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने पोस्टर और बैनर के साथ नारेबाजी भी की।संसद के मानसून सत्र के बीच सोमवार को विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद भवन परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने बिहार में चुनाव आयोग द्वारा की जा रही मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को संदिग्ध बताते हुए विरोध जताया।इस प्रदर्शन का नेतृत्व राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने किया। खरगे के साथ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), द्रमुक (डीएमके), वामपंथी दलों, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और समाजवादी पार्टी (एसपी) के सांसद भी मौजूद रहे।
नारेबाजी और पोस्टर के साथ प्रदर्शन
इस दौरान प्रदर्शनकारी सांसदों ने संसद के मकर द्वार के बाहर बड़े-बड़े बैनर और पोस्टर थाम रखे थे। इन बैनर पर लिखा था- ‘वोट चोरी बंद करो’, वहीं हाथों में लगे पोस्टरों पर ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’, ‘एसआईआर बंद करो’ जैसे शब्द लिखे थे।
बता दें कि विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की यह कवायद दरअसल बिहार में मतदाताओं को सूची से बाहर करने की चाल है, ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी दल को फायदा पहुंचाया जा सके।
विपक्ष का आरोप और रणनीति
कांग्रेस नेता नसीर हुसैन ने मीडिया से कहा कि विपक्ष हर लोकतांत्रिक तरीका अपनाएगा, ताकि देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) का पद केवल निष्पक्ष और ईमानदार व्यक्ति के हाथों में रहे। सूत्रों के अनुसार, विपक्ष इस मामले को और आगे बढ़ाने के लिए सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर भी विचार कर रहा है।
संसद का गतिरोध
विपक्ष ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों में एसआईआर के मुद्दे पर चर्चा की मांग की है। उनका कहना है कि बिहार में यह संशोधन अभ्यास ‘जनता के वोट छीनने’ की साजिश है। इसे लेकर हर दिन विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के परिणामस्वरूप, 21 जुलाई से शुरू हुए मानसून सत्र में अब तक ज्यादातर कामकाज ठप रहा है। मानसून सत्र में सिर्फ ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा को छोड़कर, संसद की कार्यवाही बार-बार स्थगित हो रही है और महत्वपूर्ण विधायी काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। विपक्षी सांसदों का कहना है कि वे सरकार और चुनाव आयोग पर दबाव बनाए रखेंगे। विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक चाहता है कि संसद में इस पर खुली बहस हो और बिहार समेत पूरे देश में मतदाता सूची से छेड़छाड़ की किसी भी संभावना को रोका जाए।

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