UP News : भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित छत्तीसगढ़ के प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का मंगलवार शाम निधन हो गया। वह 89 वर्ष के थे। उनके पुत्र शाश्वत शुक्ल ने बताया कि सांस लेने में तकलीफ के चलते उन्हें दो दिसंबर को रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था, जहां 23 दिसंबर की शाम 4:48 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

परिवार के अनुसार, शुक्ल के परिवार में उनकी पत्नी, पुत्र शाश्वत और एक पुत्री हैं। शाश्वत शुक्ल ने बताया कि अक्टूबर महीने में भी सांस संबंधी परेशानी के चलते विनोद कुमार शुक्ल को रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तबीयत में सुधार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी और तब से वे घर पर ही इलाज करा रहे थे। दो दिसंबर को अचानक तबीयत अधिक बिगड़ने पर उन्हें रायपुर एम्स ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।

विनोद कुमार शुक्ल हिंदी साहित्य के एक महत्वपूर्ण स्तंभ थे। ‘नौकर की कमीज’, ‘खिलेगा तो देखेंगे’, ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ और ‘एक चुप्पी जगह’ जैसे चर्चित उपन्यासों के रचयिता शुक्ल को 59वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 21 नवंबर को रायपुर स्थित उनके निवास पर आयोजित एक समारोह में उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया था। 

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