राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ । लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विनोद खंडारे ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए यह साफ हो गया कि भारत के साथ कूटनीतिक रूप से कौन खड़ा है और कौन नहीं। उन्होंने कहा कि युद्ध महंगा होता है और इससे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि नागरिक सुरक्षा पर काम करने की जरूरत है। रक्षा मंत्रालय के पूर्व प्रधान सलाहकार और लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विनोद खंडारे ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट कर दिया कि कूटनीतिक स्तर पर भारत के साथ कौन खड़ा है और कौन नहीं। उन्होंने कहा कि युद्ध की कीमत होती है और इससे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है। उन्होंने जोर दिया कि नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस) पर बहुत काम करने की जरूरत है, क्योंकि यह एक कमजोरी बनी रहेगी। लेफ्टिनेंट जनरल खंडारे रविवार को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक कार्यक्रम में शामिल हुए, ताकि जनता से ऑपरेशन सिंदूर पर संवाद किया जा सके। यह कार्यक्रम एक स्थानीय एनजीओ ने आयोजित किया था।
ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकी ठिकानों को बनाया गया निशाना
इस साल 22 अप्रैल को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने हमला किया था। 26 लोगों की नृशंस तरीके से हत्या कर दी गई थी। हत्या से पहले उनके धर्म की पहचान की गई थी। इसके जवाब में भारतीय ने सेना ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और पाकिस्तान व पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) नौ आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त किया था।
‘नागरिक सुरक्षा पर करना होगा काम’
जब ऑपरेशन सिंदूर के परिणामों को लेकर सवाल किया गया, तो खंडारे ने कहा, यह स्पष्ट हो गया है कि भारत के साथ कूटनीतिक रूप से कौन है और कौन नहीं। देश के अंदर भी यह स्पष्ट हो गया कि समस्याएं और कमजोर कड़ियां कहां हैं। अगर आप व्यापक रूप से सोचें तो खामियां साफतौर पर सामने आई हैं। स्वार्थी हित भी अब सामने आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि नागरिक सुरक्षा पर भी हमें बहुत काम करना होगा, क्योंकि कमजोर कड़ी बना रहेगा।
‘तकनीक के इस्तेमाल में कुशलता जरूरी’
उन्होंने आगे कहा, आज के दौर में मिसाइलों और उनकी पहुंच के कारण सब कुछ निशाने पर आ सकता है। हम जरूरी तकनीक और शोध में आगे हैं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का सही इस्तेमाल तब होता है, जब उसे चलाने वाला व्यक्ति कुशल हो। उन्होंने कहा, प्रयोगशाला से लेकर युद्ध क्षेत्र तक एक पूरी श्रृंखला है। मुझे लगता है कि हमें समझ आ गया है कि हमें कहां खड़ा होना है। उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा को राज्य सरकारों को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, ड्रोन हमले आम नागरिकों को प्रभावित करते हैं। उनके शेल्टर का क्या? सीमा राज्यों को सबसे पहले नियम बनाना चाहिए कि हर घर के नीचे एक सुरक्षा शेल्टर हो, जैसे इस्राइल और यूक्रेन में होता है। हमें दूसरों से भी सीखना चाहिए, ताकि हम वहीं गलतियां न दोहराएं।

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