
राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ । भारत और दक्षिण कोरिया ने शनिवार को सेमीकंडक्टर, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक साझेदारी का विस्तार करने को लेकर प्रतिबद्धता जताई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके दक्षिण कोरियाई समकक्ष चो ह्युन के बीच बातचीत में समग्र द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने के तरीकों पर प्रमुखता से चर्चा हुई।दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने पहलगाम आतंकी हमले और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ एकजुटता जाहिर की। उन्होंने कहा कि उनका देश भारत सरकार और भारत के लोगों के साथ खड़ा है। एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में चो ह्यून ने कहा कि दक्षिण कोरिया आतंकवाद के सख्त खिलाफ है। उन्होंने कहा, ‘हम इस मुद्दे पर बहुत सख्त और दृढ़ हैं। हम किसी भी आतंकवादी हमले के सख्त खिलाफ हैं। हम भारत सरकार और भारत के लोगों के साथ खड़े हैं।’भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। 22 अप्रैल को पहलगाम हमले में आतंकियों ने 26 लोगों की निर्मम हत्या कर दी थी। जवाब में भारत 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था, जिसमें सैकड़ों आतंकियों को ढेर कर दिया गया था। भारत ने पाकिस्तान और पीओजेके में आतंकी ढांचे पर सटीक हमले किए। भारत ने पाकिस्तान के हर दुस्साहस का जवाब दिया, उसके हर हमले को नाकाम किया और उसके हवाई ठिकानों पर बमबारी की।इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चो ह्यून के साथ द्विपक्षीय बैठक की। उन्होंने पहलगाम आतंकवादी हमले की दक्षिण कोरिया की ओर से निंदा के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि बाद में सियोल गए भारत के संसदीय प्रतिनिधिमंडल की बहुत अच्छी बैठकें हुईं।जयशंकर ने कहा, ‘मैं 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की दक्षिण कोरिया की ओर से निंदा के लिए आभार व्यक्त करना चाहता हूं। इस तथ्य के लिए भी कि जब हमारा संसदीय प्रतिनिधिमंडल सियोल गया, तो मुझे लगता है कि उनकी बहुत अच्छी बैठकें हुईं, आपने स्वयं उनसे मिलने का प्रयास किया, यह ऐसी बात है जिसकी हम सराहना करते हैं।’चो ह्यून ने कहा कि शनिवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ उनकी अच्छी बैठक हुई। उन्होंने 2015 से 2017 तक दिल्ली में राजदूत के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। पिछले 10 वर्षों में और भी अच्छे बदलाव हुए हैं। चो ह्यून ने कहा कि दिल्ली वापस आकर बहुत अच्छा लग रहा है। जब वह लगभग 10 साल पहले इस शहर में आए थे, तो भारत की संस्कृति की गहराई देखकर अभिभूत हो गए थे। मुझे भारत में कोरियाई राजदूत के रूप में सेवा करने पर बहुत गर्व है। इस दौरान मैंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत में हुए महत्वपूर्ण बदलावों को देखा। अब मैं पिछले 10 वर्षों में हुए और भी अच्छे बदलावों को देख रहा हूं। इसलिए मुझे यहां वापस आकर और अपने दोस्तों से मिलकर बहुत खुशी हो रही है।चो ह्यून ने याद किया कि जब उन्होंने राजदूत के रूप में कार्य किया था, तब उनकी मुलाकात एस जयशंकर से हुई थी, जो 2015-18 तक विदेश सचिव के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की और द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने के तरीकों की खोज की। उन्होंने कहा, ‘यह एक अच्छी बैठक थी। जब मैं यहां था और वह विदेश सचिव थे, तब मैं उनसे मिलता था।’ चो ह्यून ने कहा, ‘आज हमने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की और अपने द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। साथ ही हमारे देशों के सामने मौजूद भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक चुनौतियों के समाधान पर भी चर्चा की।’इससे पहले दक्षिण कोरियाई नेता के साथ बैठक के दौरान जयशंकर ने कहा, ‘ऐसा कम ही होता है कि आपको किसी पुराने मित्र का नए सहयोगी के रूप में स्वागत करने का अवसर मिले। इसलिए भारत में आपका फिर से स्वागत करना मेरे लिए विशेष सम्मान की बात है। कृपया अपनी नियुक्ति पर मेरी बधाई स्वीकार करें। आपको इस पद पर आए हुए मुश्किल से एक महीना ही हुआ है। यह तथ्य कि आप अपने राष्ट्रीय दिवस और हमारे राष्ट्रीय दिवस के ठीक एक दिन बाद यहां हैं, इस रिश्ते को हमारी ओर से दिए जाने वाले महत्व के बारे में बहुत कुछ कहता है।’उन्होंने कहा, ‘मैं इस अवसर पर आपको कोरिया के राष्ट्रीय मुक्ति दिवस की शुभकामनाएं भी देता हूं। मुझे लगता है कि आपकी यात्रा कई मायनों में एक बहुत ही महत्वपूर्ण समय पर हो रही है। यह हमारी विशेष रणनीतिक साझेदारी की 10वीं वर्षगांठ है। मुझे कनाडा के कनानसकिस में आपके राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री के साथ रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था।