अमेरिका के 19 राज्यों ने नए एच-1बी वीजा आवेदनों पर 1,00,000 अमेरिकी डॉलर शुल्क लगाने के देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के फैसले को “गैरकानूनी” बताते हुए मुकदमा दायर किया है। राज्यों ने चेतावनी दी है कि इस कदम से स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी और बढ़ जाएगी। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने 18 अन्य अटॉर्नी जनरल के साथ मिलकर शुक्रवार को मैसाचुसेट्स जिले के अमेरिकी जिला न्यायालय में यह मुकदमा दायर किया। उन्होंने कानूनी अधिकार या उचित प्रक्रिया के बिना एच-1बी शुल्क में “भारी” बढ़ोतरी किए जाने को चुनौती दी है।

एच-1बी वीजा कार्यक्रम के तहत उच्च कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में काम करने की अस्थायी रूप से अनुमति मिलती है और भारतीय नागरिक इसका व्यापक रूप से उपयोग करते हैं। मुकदमे में दलील दी गई है कि नए शुल्क से उन सरकारी और गैर-लाभकारी नियोक्ताओं के लिए व्यावहारिक रूप से मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी जो स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में आवश्यक सेवाएं प्रदान करने के लिए एच-1बी वीजा धारकों पर निर्भर हैं। मुकदमे में कहा गया है, “एच-1बी वीजा से प्रतिभाशाली चिकित्सकों, नर्स, शिक्षकों और अन्य कामगारों को हमारे देश के जरूरतमंद समुदायों की सेवा करने का अवसर मिलता है।

जेम्स ने एक बयान में कहा, “इस कार्यक्रम को बर्बाद करने की प्रशासन की अवैध कोशिश से न्यूयॉर्कवासियों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं हासिल करना दूभर हो जाएगा, हमारे बच्चों की शिक्षा बाधित होगी और हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा। मैं प्रवासी समुदायों को निशाना बनाने वाली इस अव्यवस्था और क्रूरता को रोकने के लिए लड़ाई जारी रखूंगी।” सितंबर में ट्रंप ने घोषणा की थी कि उनका प्रशासन सभी नए एच-1बी आवेदनों पर एकमुश्त 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाएगा।  

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