वॉशिंगटन
वेनेजुएला को लेकर अमेरिका के रुख में नरमी के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर सफाई दी है, जिसमें उन्होंने वेनेजुएला को चलाने की बात कही थी। रुबियो ने कहा कि ट्रंप हमेशा सभी विकल्प खुले रखते हैं और किसी भी संभावित खतरे से निपटने का संवैधानिक अधिकार उनके पास है।
सीबीएस न्यूज के कार्यक्रम में बातचीत के दौरान जब रुबियो से पूछा गया कि क्या फिलहाल वेनेजुएला में अमेरिकी कब्जा है, तो उन्होंने साफ किया कि मौजूदा हालात में ऐसा कुछ नहीं है। उनके मुताबिक, अमेरिका फिलहाल तेल क्वारंटीन और बड़े नौसैनिक तैनाती जैसे कदमों के जरिए वेनेजुएला सरकार पर दबाव बना रहा है।
रुबियो ने बताया कि अमेरिका की यह रणनीति वेनेजुएला के राजस्व स्रोतों को सीमित करने के लिए है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी गोलार्ध में यह अब तक की सबसे बड़ी नौसैनिक तैनाती में से एक है, जो न सिर्फ ड्रग तस्करी बल्कि प्रतिबंधित जहाजों की आवाजाही को भी रोकने में सक्षम है।

गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्लोरिडा के पाम बीच में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि अमेरिका तब तक वेनेजुएला का संचालन करेगा जब तक सुरक्षित, उचित और विवेकपूर्ण सत्ता हस्तांतरण नहीं होता। सैन्य अभियान का मकसद तानाशाह मादुरो को न्याय के कटघरे में लाना था। हम वेनेजुएला में शांति, न्याय और स्वतंत्रता चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि अमेरिका बूट्स ऑन द ग्राउंड से डरता नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को कराकास में एक संयुक्त अभियान के तहत गिरफ्तार कर देश से बाहर ले जाया गया। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, दोनों पर न्यूयॉर्क की एक अदालत में ड्रग तस्करी और नार्को-टेररिज्म से जुड़े आरोप तय किए गए हैं और उन पर मुकदमा चलेगा।

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